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बनास नदी में अवैध बजरी खनन का आरोप, फुटेज में जानें BSS सुप्रीमो नरेश मीणा ने सरकार और विपक्ष पर साधा निशाना

बनास नदी में अवैध बजरी खनन का आरोप, फुटेज में जानें BSS सुप्रीमो नरेश मीणा ने सरकार और विपक्ष पर साधा निशाना
 
बनास नदी में अवैध बजरी खनन का आरोप, फुटेज में जानें BSS सुप्रीमो नरेश मीणा ने सरकार और विपक्ष पर साधा निशाना

बनास नदी में गाद हटाने की आड़ में हो रहे कथित अवैध बजरी खनन और इससे सरकार को अरबों रुपये के राजस्व नुकसान को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारत स्वाभिमान संगठन (BSS) के सुप्रीमो नरेश मीणा ने इस मुद्दे पर सरकार के साथ-साथ सत्ता और विपक्ष दोनों को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बनास नदी में नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर बजरी का अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे राज्य सरकार को भारी आर्थिक क्षति हो रही है।

नरेश मीणा ने बताया कि इस मामले को लेकर शुक्रवार को 11 सूत्रीय जनहित मांगों के समर्थन में कोटड़ी मोड़ पर जन आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन मांगों पर कोई ठोस और स्पष्ट निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलनकारी जयपुर कूच करेंगे। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल बजरी खनन का मुद्दा नहीं, बल्कि जनहित, पर्यावरण संरक्षण और सरकारी राजस्व की लूट को रोकने से जुड़ा है।

BSS सुप्रीमो ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बनास नदी में गाद हटाने के नाम पर प्रतिदिन बड़े पैमाने पर बजरी निकाली जा रही है। इससे सरकार को रोजाना करीब 10 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा खेल सुनियोजित तरीके से चल रहा है और इसमें प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक लोग शामिल हैं। नरेश मीणा के अनुसार, इस कथित घोटाले में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़, अंता विधायक प्रमोद जैन भाया और आईएएस अधिकारी शिखर चंद सहित अन्य लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

नरेश मीणा ने कहा कि बनास नदी क्षेत्र में बजरी खनन से न केवल सरकार को आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी भारी क्षति पहुंच रही है। नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है, भूजल स्तर पर असर पड़ रहा है और आसपास के गांवों में किसानों व आम लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि आंखें मूंदे बैठे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता और विपक्ष, दोनों ही इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, जो संदेह को और गहरा करता है। नरेश मीणा ने कहा कि यदि यह सब नियमों के तहत हो रहा है, तो सरकार को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और राजस्व के आंकड़े सामने रखने चाहिए। लेकिन ऐसा न होना यह साबित करता है कि कहीं न कहीं बड़ा खेल चल रहा है।

कोटड़ी मोड़ पर होने वाले जन आंदोलन को लेकर क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। BSS कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने आंदोलन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। संगठन का कहना है कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे। वहीं प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो।

फिलहाल नरेश मीणा के इन आरोपों पर सरकार या नामजद लोगों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की निगाहें शुक्रवार को होने वाले जन आंदोलन और सरकार के रुख पर टिकी हुई हैं।