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राजस्थान में बढ़ रहा ब्रेस्ट कैंसर का खतरा: हर साल 15 हजार नए मरीज, झिझक के कारण देर से पहुंचते हैं अस्पताल, 6 हजार मौतें

राजस्थान में बढ़ रहा ब्रेस्ट कैंसर का खतरा: हर साल 15 हजार नए मरीज, झिझक के कारण देर से पहुंचते हैं अस्पताल, 6 हजार मौतें
 
राजस्थान में बढ़ रहा ब्रेस्ट कैंसर का खतरा: हर साल 15 हजार नए मरीज, झिझक के कारण देर से पहुंचते हैं अस्पताल, 6 हजार मौतें

महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर के मामले अब बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे हैं। राजस्थान में हर साल करीब 15 हजार नए मरीज सामने आ रहे हैं, जबकि समय पर इलाज नहीं मिलने और बीमारी की पहचान देर से होने के कारण लगभग 6 हजार लोगों की मौत हो जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना और जांच कराने में झिझक बीमारी को गंभीर बना देती है। खासतौर पर ग्रामीण और छोटे शहरों में कई महिलाएं सामाजिक संकोच के कारण डॉक्टर से सलाह लेने में देरी करती हैं।

पुरुष डॉक्टर को दिखाने में झिझक बन रही बड़ी वजह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर की जांच और इलाज के दौरान कई महिलाएं पुरुष डॉक्टर से परामर्श लेने में असहज महसूस करती हैं। इस झिझक के कारण वे बीमारी की शुरुआती अवस्था में अस्पताल नहीं पहुंच पातीं।

कई मामलों में मरीज तब अस्पताल आते हैं, जब बीमारी चौथी स्टेज तक पहुंच चुकी होती है। इस स्थिति में इलाज अधिक कठिन हो जाता है और बचने की संभावना भी कम हो जाती है।

राज्य में महिला विशेषज्ञों की कमी

ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में महिला डॉक्टरों की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती है। राजस्थान में इस क्षेत्र में काम करने वाली महिला विशेषज्ञों की संख्या बेहद कम है। वर्तमान में प्रदेश में केवल करीब 7 महिला डॉक्टर ही इस बीमारी के इलाज और सर्जरी से जुड़ी विशेषज्ञ सेवाएं दे रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिला डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से मरीजों का भरोसा बढ़ेगा और वे समय पर जांच व इलाज के लिए आगे आ सकेंगी।

शुरुआती जांच से बच सकती है जान

कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर का समय पर पता चल जाए तो इलाज काफी प्रभावी हो सकता है। महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए।

इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए—

  • स्तन में गांठ महसूस होना
  • स्तन के आकार या बनावट में बदलाव
  • दर्द या सूजन रहना
  • निप्पल से असामान्य स्राव होना
  • त्वचा में बदलाव दिखाई देना

जागरूकता से कम हो सकता है खतरा

डॉक्टरों का कहना है कि महिलाओं को नियमित जांच और स्क्रीनिंग के प्रति जागरूक करना जरूरी है। परिवार के लोगों को भी महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को गंभीरता से लेना चाहिए।

विशेषज्ञों ने अपील की है कि बीमारी को छिपाने या शर्म के कारण इलाज में देरी करने के बजाय समय रहते डॉक्टर से संपर्क किया जाए।

ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच सबसे बड़ी जरूरत सामाजिक झिझक खत्म करने और महिलाओं को स्वास्थ्य जांच के लिए प्रोत्साहित करने की है। समय पर पहचान और सही इलाज से हजारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।