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आरक्षण लॉटरी के बाद फाइनल होगा भाजपा का टिकट फॉर्मूला, इंटरनल सर्वे से तय होंगे पंचायत-निकाय प्रत्याशी

आरक्षण लॉटरी के बाद फाइनल होगा भाजपा का टिकट फॉर्मूला, इंटरनल सर्वे से तय होंगे पंचायत-निकाय प्रत्याशी
 
आरक्षण लॉटरी के बाद फाइनल होगा भाजपा का टिकट फॉर्मूला, इंटरनल सर्वे से तय होंगे पंचायत-निकाय प्रत्याशी

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा ने प्रत्याशियों के चयन को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट करना शुरू कर दिया है। पार्टी आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही टिकट वितरण का अंतिम फॉर्मूला तय करेगी। इसके लिए पार्टी संगठन की ओर से जमीनी स्तर पर इंटरनल सर्वे कराया जाएगा। सर्वे में संभावित प्रत्याशियों की लोकप्रियता, क्षेत्र में पकड़ और चुनाव जीतने की क्षमता जैसे पहलुओं को परखा जाएगा।

भाजपा सूत्रों के अनुसार, आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद पार्टी प्रत्येक वार्ड और पंचायत क्षेत्र में संभावित दावेदारों की जानकारी जुटाएगी। इसके आधार पर स्थानीय संगठन से फीडबैक लिया जाएगा और फिर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

आरक्षण के बाद बदलेगा टिकट का गणित

पंचायत और निकाय चुनाव में वार्डों के आरक्षण की लॉटरी के कारण कई संभावित दावेदारों के चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। कुछ सीटें महिलाओं, OBC, SC या ST वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद सामान्य वर्ग के दावेदारों को नए विकल्प तलाशने पड़ेंगे।

भाजपा अब आरक्षण सूची सामने आने के बाद यह देखेगी कि किस वार्ड या पंचायत में किस वर्ग का मजबूत चेहरा उपलब्ध है। पार्टी का प्रयास ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का रहेगा, जिनकी स्थानीय स्तर पर अच्छी पकड़ हो और जो संगठन के लिए मजबूत चुनावी विकल्प साबित हो सकें।

फील्ड सर्वे से जुटाया जाएगा फीडबैक

प्रत्याशियों के चयन में पार्टी के आंतरिक सर्वे को अहम माना जा रहा है। फील्ड में कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों से संभावित उम्मीदवारों को लेकर फीडबैक लिया जाएगा।

सर्वे के दौरान उम्मीदवार की क्षेत्र में छवि, जनता के बीच स्वीकार्यता, संगठन के साथ सक्रियता और चुनाव जीतने की संभावना जैसे पहलुओं पर जानकारी जुटाई जा सकती है। इसके अलावा स्थानीय सामाजिक समीकरणों को भी टिकट वितरण में ध्यान में रखा जाएगा।

दावेदारों की सक्रियता बढ़ी

आरक्षण लॉटरी के बाद संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता भी बढ़ने लगी है। टिकट की उम्मीद लगाए बैठे नेता और कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में संपर्क बढ़ा रहे हैं। पार्टी के स्थानीय कार्यक्रमों में भागीदारी के साथ जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

भाजपा संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे प्रत्याशियों के चयन की होगी, जो पार्टी के आधार वोट के साथ स्थानीय मतदाताओं के बीच भी प्रभाव रखते हों।

आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब पार्टी की नजर इंटरनल सर्वे और संगठनात्मक फीडबैक पर रहेगी। इसके बाद प्रदेश स्तर पर संभावित नामों पर चर्चा होगी और अंतिम निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में पंचायत और निकाय चुनाव में भाजपा का टिकट फॉर्मूला स्थानीय समीकरण, आरक्षण और जमीनी सर्वे के आधार पर तय होने की संभावना है।