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जयपुर भाजपा कार्यालय ब्लैकआउट मामला, सस्पेंड इलेक्ट्रीशियन बाबू सिंह के आरोपों से नया मोड़

 
जयपुर भाजपा कार्यालय ब्लैकआउट मामला, सस्पेंड इलेक्ट्रीशियन बाबू सिंह के आरोपों से नया मोड़

राजस्थान की राजधानी Jaipur स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में 11 जून को केंद्रीय रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw के कार्यक्रम के दौरान हुई बिजली गुल (ब्लैकआउट) की घटना अब नए विवाद में बदलती दिख रही है। इस मामले में सस्पेंड किए गए हीरापुरा 400 केवी जीएसएस के इलेक्ट्रीशियन बाबू सिंह ने अब अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है।

गौरतलब है कि कार्यक्रम के दौरान अचानक बिजली सप्लाई बाधित होने से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए संबंधित इलेक्ट्रीशियन बाबू सिंह को सस्पेंड कर दिया गया था।

हालांकि, अब बाबू सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताते हुए अधिकारियों पर ही गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि ब्लैकआउट की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ उन पर डाल दी गई, जबकि वास्तविक तकनीकी और प्रशासनिक कारणों की अनदेखी की गई है।

उनके आरोपों के बाद विभागीय स्तर पर मामले की दोबारा जांच की मांग उठने लगी है। सूत्रों के अनुसार, अब इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि आखिर बिजली आपूर्ति बाधित होने के पीछे वास्तविक कारण क्या थे।

इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और तकनीकी प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वीआईपी कार्यक्रम के दौरान बिजली आपूर्ति जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में कई स्तरों पर निगरानी होनी चाहिए, ताकि इस तरह की स्थिति से बचा जा सके।

वहीं, राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे तकनीकी त्रुटि मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया में हुई जल्दबाजी बता रहे हैं।

फिलहाल, संबंधित विभाग द्वारा पूरे मामले की जांच जारी है और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि ब्लैकआउट के लिए वास्तविक रूप से कौन जिम्मेदार था।

कुल मिलाकर, जयपुर ब्लैकआउट मामला अब केवल तकनीकी खराबी तक सीमित न रहकर प्रशासनिक विवाद का रूप लेता जा रहा है, जिसमें सस्पेंड कर्मचारी के आरोपों ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।