BJP विधायक नहीं चाहते उनके क्षेत्र से मेयर बने, जयपुर में रोचक बना महापौर का चुनाव, मेयर और डिप्टी मेयर के लिए अलग-अलग लॉबिंग
जयपुर नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। 150 वार्डों वाले नगर निगम में बीजेपी को 78 सीटें मिली हैं। बहुमत हासिल करने के बाद अब पार्टी के भीतर मेयर और डिप्टी मेयर पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। दावेदारों और उनके समर्थकों ने अपने-अपने स्तर पर लॉबिंग शुरू कर दी है।
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद बीजेपी के सामने अब नगर निगम की कमान किसे सौंपी जाए, यह बड़ा सवाल है। मेयर पद के लिए पार्टी के कई नेताओं और पार्षदों के नामों की चर्चा शुरू हो गई है। संभावित दावेदारों के समर्थक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क साध रहे हैं। वहीं डिप्टी मेयर पद को लेकर भी समीकरण बनाए जा रहे हैं।
जयपुर में मेयर पद के लिए वैश्य समाज से चेहरा उतारने की चर्चा सबसे ज्यादा है। पार्टी के भीतर सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संभावित नामों पर मंथन चल रहा है। हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से मेयर पद के लिए किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतिम फैसला बीजेपी के वरिष्ठ नेतृत्व की ओर से लिया जाएगा।
बीजेपी को 150 में से 78 सीटें मिलने के बाद पार्टी के पास बहुमत है। ऐसे में मेयर के चुनाव में पार्टी के पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। अब नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व किस पार्षद को मेयर पद के लिए आगे करता है और डिप्टी मेयर के लिए किस नाम पर सहमति बनती है।
चुनाव परिणाम के बाद निगम की राजनीति में बैठकों और मुलाकातों का दौर भी तेज होने की संभावना है। संभावित दावेदार अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकते हैं। वहीं पार्टी नेतृत्व के सामने सभी सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को संतुलित करने की चुनौती होगी।
जयपुर नगर निगम के मेयर पद को लेकर आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है। फिलहाल वैश्य समाज से मेयर बनाने की चर्चा ने राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ लिया है। अब देखना होगा कि बीजेपी नेतृत्व किस नाम पर भरोसा जताता है और मेयर के साथ डिप्टी मेयर पद की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है।
