बीजेपी का पूर्व गहलोत सरकार पर गंभीर आरोप, कहा- UP से गड़बड़ी की सूचना पर भी नहीं हुई जांच
राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है। राज्य वित्त आयोग के चेयरमैन अरुण चतुर्वेदी और सामाजिक न्याय मंत्री अविनाश गहलोत ने पिछली कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चतुर्वेदी ने कहा कि कांग्रेस के राज में युवाओं के साथ लगातार धोखा होता था। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से तीन भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी की रिपोर्ट आने के बाद भी गहलोत सरकार ने कोई जांच नहीं की और न ही कोई गिरफ्तारी की। चतुर्वेदी ने कहा कि पेपर लीक पिछली सरकार के बड़े अधिकारियों के आशीर्वाद और संरक्षण में हो रहे थे।
यह परीक्षा 2018 में सरकारी भर्ती नोटिफिकेशन जारी होने के बाद हुई थी और अब SOG ने OMR शीट में गड़बड़ी का खुलासा किया है। SOG के खुलासे के बाद भारतीय जनता पार्टी पिछली कांग्रेस सरकार पर हमला बोल रही है।
लखनऊ में FIR दर्ज की गई थी।
अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि 2019 में महिला सशक्तिकरण सुपरवाइजर, लेबोरेटरी असिस्टेंट और एग्रीकल्चर सुपरवाइजर समेत तीन बड़ी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी हुई थी। उन्होंने कहा कि अगस्त 2019 में गोमती नगर, लखनऊ, उत्तर प्रदेश में दर्ज FIR के बाद ₹6.15 मिलियन (US$1.5 मिलियन) बरामद किए गए थे। उस समय के सबऑर्डिनेट सर्विसेज़ सिलेक्शन बोर्ड और राजस्थान सरकार को इस मामले की जानकारी दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि सिलेक्शन बोर्ड ने धोखाधड़ी के आरोपियों को जांच कमेटी में शामिल किया था। BJP ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने इसकी मंज़ूरी दी थी। नतीजतन, पूरा मामला दबा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि OMR शीट के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई, जिसके चलते फेल उम्मीदवारों को पास और फेल उम्मीदवारों को फेल मार्क कर दिया गया।
दो एजेंट गिरफ्तार
सामाजिक न्याय मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में, परीक्षा के दौरान उत्तर प्रदेश की एक एजेंसी को राजस्थान के लिए हायर किया गया था। कुछ दलालों ने एजेंसी से संपर्क किया और OMR शीट के साथ छेड़छाड़ की साजिश रची। पूरी साजिश में शामिल दो एजेंटों को उत्तर प्रदेश में गिरफ्तार किया गया। उनसे पूछताछ के दौरान पूरा मामला सामने आया। अविनाश गहलोत ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पेपर लीक की जानकारी मिलने के बाद भी उस समय की सरकार ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। मंत्री ने कहा कि 2019 में लखनऊ के गोमती नगर में FIR नंबर 958 दर्ज की गई थी, और उसमें पूरी जानकारी है।
कांग्रेस राज में कुल 143 केस दर्ज हुए थे
स्टेट फाइनेंस कमीशन के चेयरमैन अरुण चतुर्वेदी ने पिछली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस राज में कुल 143 केस दर्ज हुए थे। इनमें से स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SOG) ने 428 लोगों को गिरफ्तार किया था। चतुर्वेदी ने कहा कि उस समय 19 एग्जाम हुए थे, जिनमें से 19 एग्जाम पेपर लीक की वजह से कैंसिल कर दिए गए थे। ऐसा रिकॉर्ड राजस्थान के अलावा देश में कहीं और नहीं बना है।
चतुर्वेदी ने कहा कि BJP सरकार के सत्ता में आने के बाद इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि BJP सरकार के सत्ता में आने के बाद से 326 एग्जाम हुए हैं, और वे सभी एग्जाम आसान और ट्रांसपेरेंट तरीके से हुए हैं। उन्होंने कहा कि सब-इंस्पेक्टर भर्ती एग्जाम केस में अब तक 138 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
चतुर्वेदी ने कहा कि मौजूदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उस समय के शिक्षा मंत्री को यह भी बताना चाहिए कि उस समय के सभी एग्जाम के पेपर लीक क्यों हुए थे। चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि RPSC के रिजल्ट में इस बात के सबूत मिलते हैं कि आपने अपने चहेतों को पद दिलाने के लिए किन-किन स्कीमों और कनेक्शन का इस्तेमाल किया।
