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नगर निगम चुनाव में BJP का दबदबा, 80 में 53 वार्ड जीते; लगातार 7वीं बार बनेगा बोर्ड

नगर निगम चुनाव में BJP का दबदबा, 80 में 53 वार्ड जीते; लगातार 7वीं बार बनेगा बोर्ड
 
नगर निगम चुनाव में BJP का दबदबा, 80 में 53 वार्ड जीते; लगातार 7वीं बार बनेगा बोर्ड

नगर निगम चुनाव के सभी 80 वार्डों के आधिकारिक परिणाम घोषित होने के साथ ही शहर में नई नगर निगम बोर्ड की तस्वीर साफ हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए 53 वार्डों में जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ भाजपा ने नगर निकाय में लगातार सातवीं बार अपना बोर्ड बनाना तय कर लिया है। वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को इस चुनाव में 23 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा।

चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। पार्टी ने कुल 80 वार्डों में से 53 पर जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया। इस तरह बोर्ड गठन के लिए भाजपा को किसी अन्य दल या निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी। चुनाव परिणामों ने नगर निगम में भाजपा की मजबूत पकड़ को एक बार फिर साबित किया है।

कांग्रेस के लिए चुनाव परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहे। पार्टी सिर्फ 23 वार्डों में जीत दर्ज कर सकी। भाजपा और कांग्रेस के बीच जीत का अंतर 30 वार्डों का रहा। इस बड़े अंतर ने स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं। चुनाव के दौरान कांग्रेस ने कई स्थानीय मुद्दों को लेकर भाजपा को घेरने की कोशिश की थी, लेकिन परिणामों में उसका असर सीमित नजर आया।

भाजपा की लगातार सातवीं जीत स्थानीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नगर निगम में लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद पार्टी एक बार फिर मतदाताओं का भरोसा हासिल करने में सफल रही। 53 वार्डों में जीत ने पार्टी के संगठन और स्थानीय स्तर पर उसकी चुनावी रणनीति को मजबूती दी है।

नगर निगम चुनाव में पार्षदों की जीत के साथ अब अगला चरण बोर्ड गठन और महापौर के चुनाव का होगा। भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण बोर्ड गठन की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान रहने की उम्मीद है। पार्टी अपने जीते हुए पार्षदों में से महापौर पद के लिए उम्मीदवार का चयन करेगी। इसके लिए पार्टी नेतृत्व की ओर से जल्द ही विचार-विमर्श शुरू किया जा सकता है।

दूसरी ओर, कांग्रेस के सामने अब अपने प्रदर्शन की समीक्षा करने की चुनौती है। 23 सीटों पर जीत के बावजूद पार्टी भाजपा के मुकाबले काफी पीछे रही। कांग्रेस को यह देखना होगा कि किन वार्डों में उसका प्रदर्शन कमजोर रहा और किन स्थानीय मुद्दों का चुनाव में असर पड़ा। आने वाले समय में पार्टी संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारी के लिए रणनीति बनाने पर जोर दे सकती है।

चुनाव परिणामों से यह भी साफ हो गया है कि शहर की स्थानीय राजनीति में फिलहाल भाजपा का प्रभाव मजबूत बना हुआ है। 80 में 53 सीटों के साथ पार्टी के पास बोर्ड में स्पष्ट बहुमत है। कांग्रेस 23 सीटों के साथ विपक्ष की भूमिका में रहेगी।

कुल मिलाकर नगर निगम चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम किया है। लगातार सातवीं बार बोर्ड बनाने की तैयारी के साथ पार्टी ने स्थानीय राजनीति में अपनी मजबूत स्थिति बरकरार रखी है। अब निगाहें महापौर के चुनाव और नए बोर्ड के गठन पर रहेंगी।