कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व की दिशा में बड़ा कदम, इको-टूरिज्म और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
राजस्थान सरकार ने राज्य के महत्वाकांक्षी कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व को अधिसूचित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। इस परियोजना के तहत न केवल वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
प्रस्तावित टाइगर रिजर्व में कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य (राजसमंद) और टोडगढ़-रावली वन्यजीव अभयारण्य (ब्यावर) को शामिल किया गया है। इस संबंध में वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस परियोजना को पहले ही 24 अगस्त 2023 को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। इससे पहले उसी माह इसकी तकनीकी समिति द्वारा भी इसे स्वीकृति प्रदान की गई थी।
सरकार की योजना के तहत इस क्षेत्र में दो नए सफारी रूट विकसित किए जाएंगे, जिससे पर्यटकों को वन्यजीवों के करीब से दर्शन का अवसर मिल सकेगा। इसके साथ ही एक समर्पित पैंथर सफारी शुरू करने की भी योजना है, जो पर्यटकों के लिए एक आकर्षक अनुभव साबित होगी और क्षेत्रीय पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, इस टाइगर रिजर्व के बनने से क्षेत्र की जैव विविधता का संरक्षण होगा और वन्यजीवों के सुरक्षित आवास सुनिश्चित किए जा सकेंगे। साथ ही, इको-टूरिज्म के विकास से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, जैसे गाइडिंग, रिसॉर्ट, होमस्टे और अन्य पर्यटन सेवाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी। पर्यटन के बढ़ने से स्थानीय व्यापार, परिवहन और अन्य सेवाओं को भी लाभ मिलेगा।
फिलहाल, सरकार और संबंधित विभाग इस परियोजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व राज्य के प्रमुख वन्यजीव केंद्रों में से एक बनकर उभरेगा और राजस्थान की पहचान को और भी मजबूत करेगा।
