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राजस्थान में OBC आरक्षण को लेकर बड़ा कदम: 10 जुलाई से शुरू होगा घर-घर सर्वे, 13 दिन में पूरी होगी प्रक्रिया

 
राजस्थान में OBC आरक्षण को लेकर बड़ा कदम: 10 जुलाई से शुरू होगा घर-घर सर्वे, 13 दिन में पूरी होगी प्रक्रिया

राजस्थान में पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों से पहले अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। ओबीसी आयोग की ओर से प्रदेश में ओबीसी परिवारों का सर्वे शुरू किया जा रहा है। इसके तहत शुक्रवार 10 जुलाई से कर्मचारी घर-घर जाकर सर्वे का काम शुरू करेंगे। आयोग ने तय किया है कि यह पूरी प्रक्रिया 13 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी।

ओबीसी आरक्षण के लिए जरूरी आंकड़े जुटाने के उद्देश्य से यह सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के दौरान ओबीसी समुदाय से जुड़े परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति समेत अन्य आवश्यक जानकारियां एकत्र की जाएंगी। इन आंकड़ों के आधार पर आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसके बाद प्रदेश में स्थानीय निकाय और पंचायतीराज चुनावों में ओबीसी आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा।

सर्वे के लिए नियुक्त कर्मचारी घर-घर जाकर निर्धारित प्रारूप के अनुसार जानकारी जुटाएंगे। आयोग ने सर्वे प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सही आंकड़े प्राप्त करना बेहद जरूरी है, ताकि आरक्षण का निर्धारण वास्तविक स्थिति के आधार पर किया जा सके।

गौरतलब है कि राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव से पहले आरक्षण व्यवस्था को अंतिम रूप देना जरूरी है। इसी को देखते हुए ओबीसी आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। आयोग द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की प्रक्रिया तय करेगी।

ओबीसी समुदाय लंबे समय से स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण के लिए सही आंकड़ों की मांग करता रहा है। ऐसे में यह सर्वे राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद आयोग आंकड़ों का विश्लेषण करेगा और अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा।

अधिकारियों के मुताबिक, सर्वे के दौरान कर्मचारियों को किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सभी क्षेत्रों में टीमों को सक्रिय किया जाएगा, ताकि निर्धारित समय सीमा के अंदर काम पूरा हो सके। इसके बाद प्राप्त जानकारी के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राज्य सरकार और ओबीसी आयोग की नजर अब इस सर्वे पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, राजनीतिक दल भी इस सर्वे के नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसका सीधा असर आगामी स्थानीय चुनावों पर पड़ सकता है।