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पश्चिम क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में बड़ा संकेत, किसान योजनाओं के लिए बनेगा फार्मर आईडी मुख्य आधार

पश्चिम क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में बड़ा संकेत, किसान योजनाओं के लिए बनेगा फार्मर आईडी मुख्य आधार
 
पश्चिम क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में बड़ा संकेत, किसान योजनाओं के लिए बनेगा फार्मर आईडी मुख्य आधार

राजस्थान की धरती पर मंगलवार को आयोजित पश्चिम क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (West Zone Agriculture Conference) में किसानों से जुड़ी नीतियों को लेकर केंद्र सरकार ने बड़े बदलावों के संकेत दिए हैं। इस सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि अब किसान कल्याण योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और सीधे किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।

सम्मेलन के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में सभी सरकारी कृषि योजनाओं के लाभ वितरण के लिए “फार्मर आईडी” को मुख्य आधार बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक किसानों तक ही योजनाओं का लाभ पहुंचे और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या बिचौलियों की भूमिका को खत्म किया जा सके।

कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, अधिकारियों और किसानों ने भी भाग लिया। चर्चा के दौरान डिजिटल कृषि प्रणाली, तकनीकी नवाचार और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फार्मर आईडी प्रणाली लागू होने से किसानों का एक केंद्रीकृत डेटा तैयार होगा, जिससे सब्सिडी, बीमा और अन्य सरकारी लाभों को सीधे और तेजी से किसानों के बैंक खातों तक पहुंचाया जा सकेगा।

इस पहल को कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आएगी।

भारत सरकार की ओर से पहले से ही कृषि क्षेत्र में कई डिजिटल पहलें चलाई जा रही हैं, और फार्मर आईडी को उसी श्रृंखला का एक मजबूत विस्तार माना जा रहा है।

कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने भी इस प्रस्ताव पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। कुछ किसानों ने इसे लाभकारी बताया, जबकि कुछ ने इसके क्रियान्वयन और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच को लेकर सवाल उठाए।

फिलहाल सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में देशभर में इस प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि कृषि योजनाओं का लाभ बिना किसी देरी और बाधा के सीधे किसानों तक पहुंच सके।