आतंकी नेटवर्क का बड़ा खुलासा: लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी जयपुर में बदलकर रह रहा था पहचान, वीडियो में देंखे फर्जी दस्तावेज से पासपोर्ट बनवाकर फरार
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ है, जिसमें प्रतिबंधित आतंकी संगठन Lashkar-e-Taiba से जुड़े एक सक्रिय सदस्य द्वारा भारत में घुसपैठ कर पहचान छिपाने और फर्जी दस्तावेजों के सहारे देश छोड़ने की जानकारी सामने आई है।जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी आतंकी Omar Haris, जिसे उसके तेज मूवमेंट और लगातार ठिकाना बदलने की आदत के कारण “खरगोश” कोडनेम दिया गया था, साल 2012 में पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से प्रवेश कर आया था। इसके बाद वह लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचते हुए घाटी में सक्रिय रहा और धीरे-धीरे अपने नेटवर्क को मजबूत करता गया।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने बाद में अपनी पहचान पूरी तरह बदलकर देश के विभिन्न हिस्सों में सामान्य नागरिक की तरह रहना शुरू किया। इसी दौरान वह राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंचा, जहां उसने फर्जी पहचान दस्तावेज तैयार कराए और एक स्थानीय महिला से निकाह किया। अधिकारियों के मुताबिक, यह निकाह भी एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य सामाजिक रूप से वैध पहचान हासिल करना था।सूत्रों के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरोपी ने भारतीय पासपोर्ट भी प्राप्त कर लिया और इसके बाद वह भारत से बाहर निकलने में सफल रहा। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि देश छोड़ने के बाद वह पश्चिम एशिया की ओर भागा और अब उसका संभावित ठिकाना Saudi Arabia में हो सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की घुसपैठ का नहीं है, बल्कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो पहचान बदलने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सीमा पार मूवमेंट को आसान बनाने में सक्रिय है।जांच अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने अपनी गतिवियों को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया और वर्षों तक स्थानीय आबादी के बीच सामान्य जीवन जीता रहा, जिससे उस पर संदेह करना मुश्किल हो गया। उसकी गतिविधियों का खुलासा हाल ही में चल रही आतंक-रोधी जांच के दौरान हुआ, जिसमें डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य अहम साबित हुए।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि भारत में उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे और किस स्तर तक यह नेटवर्क फैला हुआ है।इस मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। एजेंसियां अब यह जांच कर रही हैं कि फर्जी पहचान के आधार पर पासपोर्ट कैसे जारी हुआ और इसमें किस स्तर पर चूक हुई। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इस आतंकी नेटवर्क से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं।
