NEET पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा: 60 लाख में सौदा तय, 40 लाख एडवांस दिए जाने का दावा
NEET पेपर लीक मामले की जांच में एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने पूरे देश की परीक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, पेपर का सौदा पहले 60 लाख रुपये में तय हुआ था, जिसे बाद में बढ़ाकर 65 लाख रुपये तक कर दिया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस सौदे के तहत 40 लाख रुपये एडवांस के रूप में दिए गए थे।
सूत्रों के अनुसार, यह खुलासा जांच के दौरान जुटाए गए डिजिटल सबूतों और पूछताछ के आधार पर सामने आया है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका की विस्तृत जांच अभी जारी है।
राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने अब तक इस मामले में 167 अभ्यर्थियों से पूछताछ की है। इन पूछताछों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन परिस्थितियों में प्रश्नपत्र लीक हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि क्या यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित था या इसके पीछे एक संगठित रैकेट सक्रिय था।
वहीं, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस केस में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है, जिनके आधार पर आगे की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। सीबीआई अब इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय लेन-देन, डिजिटल संचार और संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह मामला केवल परीक्षा लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संगठित तरीके से परीक्षा प्रणाली को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। इस वजह से पूरे नेटवर्क को समझने और इसके पीछे मौजूद लोगों तक पहुंचने के लिए कई स्तरों पर जांच की जा रही है।
इस बीच, छात्रों और अभिभावकों में इस खुलासे के बाद भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों से मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गहरा असर पड़ता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों को रोकने के लिए केवल जांच ही नहीं, बल्कि सिस्टम में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार भी जरूरी हैं। पेपर सुरक्षा से लेकर परीक्षा केंद्रों की निगरानी तक हर स्तर पर सख्ती बढ़ाने की आवश्यकता बताई जा रही है।
सरकारी स्तर पर भी इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
फिलहाल, SOG और CBI दोनों ही स्तर पर जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पूरे देश की नजर अब इस बात पर टिकी है कि इस पेपर लीक नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसमें और कौन-कौन शामिल हो सकता है।
