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**जयपुर राष्ट्रीय संगोष्ठी में बड़ा खुलासा: CJI खुद साइबर ठगी का शिकार

**जयपुर राष्ट्रीय संगोष्ठी में बड़ा खुलासा: CJI खुद साइबर ठगी का शिकार
 
**जयपुर राष्ट्रीय संगोष्ठी में बड़ा खुलासा: CJI खुद साइबर ठगी का शिकार

राजधानी जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में साइबर अपराध और सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सम्मेलन के दौरान बताया कि वे खुद साइबर ठगी के शिकार हो चुके हैं।

CJI ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ठगों ने उनके नाम से फर्जी वेबसाइट्स तैयार की और उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि इस ठगी के दौरान उनके नाम का दुरुपयोग सिर्फ ऑनलाइन सीमित नहीं रहा, बल्कि ठगों ने उनके परिवार को भी निशाना बनाया। उनकी बहन और बेटी को उनके नाम से फर्जी संदेश भेजे गए, ताकि उन्हें जाल में फंसाया जा सके।

इस खुलासे ने संगोष्ठी में मौजूद सभी प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों को चौंका दिया। CJI ने कहा कि यह घटना यह दिखाती है कि साइबर अपराध केवल आम लोगों का ही नहीं, बल्कि उच्च पदों पर कार्यरत व्यक्तियों का भी जीवन प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह सभी के लिए एक चेतावनी है कि ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना कितना जरूरी है।

संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बताया कि डिजिटल दुनिया में पहचान की चोरी और फर्जी वेबसाइट्स के माध्यम से ठगी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे साइबर अपराध के नए तरीके सामने आ रहे हैं।

विशेषज्ञों ने बताया कि अक्सर अपराधी किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति का नाम लेकर फर्जी ईमेल, सोशल मीडिया प्रोफाइल और वेबसाइट्स बनाते हैं। इसके जरिए वे वित्तीय लाभ कमाने, निजी जानकारी चुराने और परिवार या मित्रों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।

CJI ने संगोष्ठी में सभी अधिकारियों और आम नागरिकों को सुझाव दिया कि वे अपने डिजिटल व्यवहार को सुरक्षित रखें। उन्होंने कहा कि लोगों को ऑनलाइन संदेशों, लिंक और वेबसाइट्स के प्रति सतर्क रहना चाहिए। किसी भी अज्ञात स्रोत से प्राप्त जानकारी या अनुरोध पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस खुलासे के बाद जोर देकर कहा कि परिवार के सदस्य भी साइबर खतरों के प्रति जागरूक हों। बच्चों और बुजुर्गों को फर्जी संदेशों और ऑनलाइन धोखाधड़ी के तरीकों के बारे में शिक्षित करना आवश्यक है।

जयपुर में आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी केवल तकनीकी विशेषज्ञों के लिए ही नहीं, बल्कि आम जनता और सरकारी अधिकारियों के लिए भी जागरूकता फैलाने का मंच साबित हुई। CJI का यह खुलासा यह दर्शाता है कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी उपायों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति को अपनी पहचान और निजी जानकारी की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में कानूनी और तकनीकी उपायों को अपनाना आवश्यक है। पहचान की चोरी और फर्जी संदेशों को रोकने के लिए सरकार और तकनीकी कंपनियों को मिलकर काम करना होगा।

इस संगोष्ठी ने पूरे देश में साइबर सुरक्षा के महत्व को उजागर किया और यह संदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति – चाहे वह आम नागरिक हो या उच्च पद पर कार्यरत अधिकारी – साइबर अपराध से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।