Aapka Rajasthan

CJP के प्रदर्शन पर दिल्ली मेट्रो को लेकर बड़ा खुलासा, DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- न ट्रेनें रद्द हुईं, न सेवाओं में कटौती

CJP के प्रदर्शन पर दिल्ली मेट्रो को लेकर बड़ा खुलासा, DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- न ट्रेनें रद्द हुईं, न सेवाओं में कटौती
 
CJP के प्रदर्शन पर दिल्ली मेट्रो को लेकर बड़ा खुलासा, DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- न ट्रेनें रद्द हुईं, न सेवाओं में कटौती

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान मेट्रो सेवाओं को लेकर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सुप्रीम कोर्ट में अहम जानकारी दी है। DMRC ने बुधवार को दाखिल अपने आदेश पालन हलफनामे में बताया कि प्रदर्शन के दिन मेट्रो ट्रेन सेवाओं में न तो कटौती की गई और न ही किसी ट्रेन को रद्द किया गया। हालांकि, सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के 303 स्टेशनों में से 45 पर यात्रियों के प्रवेश और निकास को सीमित किया गया था। DMRC के अनुसार, बाकी 258 स्टेशन पूरी तरह चालू रहे। यह संख्या मेट्रो नेटवर्क के 85 प्रतिशत से अधिक हिस्से के बराबर है। कॉरपोरेशन ने कहा कि प्रभावित स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला पुलिस के सुरक्षा आकलन और निर्देशों के आधार पर लिया गया था।

45 मेट्रो स्टेशनों पर सीमित किया गया प्रवेश-निकास

DMRC ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 10 अक्टूबर को सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर 45 मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास को सीमित किया गया था। ये स्टेशन दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के कुल 303 स्टेशनों का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा हैं।

कॉरपोरेशन के मुताबिक, शेष 258 स्टेशनों पर मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहीं। DMRC ने स्पष्ट किया कि उस दिन ट्रेन सेवाओं को रद्द नहीं किया गया था और न ही मेट्रो संचालन में कटौती की गई थी।हलफनामे में कहा गया कि स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला दिल्ली पुलिस के आकलन के आधार पर लिया गया। यह कदम सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस के निर्देशों का पालन करने के लिए उठाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दाखिल किया हलफनामा

DMRC ने यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के बाद दाखिल की। अदालत में दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो स्टेशन बंद करने और ट्रेनों को रद्द किए जाने की आशंका को लेकर याचिका दायर की गई थी।सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि दिल्ली आने वाली मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जाए। अदालत ने कहा था कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर परिवहन सेवाओं को पूरी तरह बाधित नहीं किया जाना चाहिए।चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने DMRC और मामले से जुड़े अन्य पक्षों को आदेश के पालन से संबंधित हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया था।

पुलिस के आकलन के आधार पर लिया गया फैसला

DMRC ने अपने पक्ष में कहा कि मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास सीमित करने का फैसला पुलिस के निर्देशों के अनुसार लिया गया था। कॉरपोरेशन का कहना है कि यह प्रतिबंध पूरे नेटवर्क पर लागू नहीं था, बल्कि केवल 45 स्टेशनों तक सीमित रहा।इस मामले में मेट्रो सेवाओं की स्थिति को लेकर DMRC का हलफनामा महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे प्रदर्शन के दिन ट्रेन संचालन और स्टेशन प्रतिबंधों के बारे में आधिकारिक पक्ष सामने आया है।

सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन को लेकर बहस

दिल्ली में बड़े प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन को सुचारु बनाए रखना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होती है। एक ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस सुरक्षा संबंधी कदम उठाती है, वहीं दूसरी ओर आम यात्रियों की आवाजाही प्रभावित न हो, यह भी जरूरी है।DMRC के हलफनामे के मुताबिक, 10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क के अधिकांश स्टेशन चालू रहे और ट्रे रद्द नहीं की गईं। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन से संबंधित आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी।