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बीमा क्लेम के नाम पर बड़ा खेल: गुजरात–राजस्थान में गिरोह पर आरोप, गरीब-बीमार लोगों को बनाते हैं निशाना

 
बीमा क्लेम के नाम पर बड़ा खेल: गुजरात–राजस्थान में गिरोह पर आरोप, गरीब-बीमार लोगों को बनाते हैं निशाना

गरीब, बीमार और असहाय लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये के बीमा क्लेम से जुड़े एक बड़े रैकेट का खुलासा होने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों और सामने आ रही जानकारियों के अनुसार गुजरात और राजस्थान में सक्रिय कुछ बीमा एजेंटों का एक संगठित गिरोह कथित रूप से इस पूरे नेटवर्क को चला रहा है।

बताया जा रहा है कि यह गिरोह ऐसे लोगों को टारगेट करता है जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे होते हैं—जैसे किडनी फेलियर के मरीज, लंबे समय से इलाज करा रहे बीमार लोग या फिर आर्थिक रूप से बेहद कमजोर व्यक्ति। कुछ मामलों में शराब की लत और गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों से जूझ रहे लोगों को भी इस जाल में फंसाने की बात सामने आ रही है।

आरोप है कि इन लोगों के नाम पर बड़े-बड़े बीमा पॉलिसी कराई जाती हैं, और बाद में उनकी मौत की स्थिति में 50 लाख, 80 लाख और कभी-कभी करोड़ों रुपये तक के बीमा क्लेम हासिल करने की कोशिश की जाती है। यह पूरा नेटवर्क बीमा कंपनियों की जांच प्रणाली को चकमा देने के लिए सुनियोजित तरीके से काम करता है।

सूत्रों के मुताबिक, गिरोह में शामिल एजेंट पहले ऐसे लोगों की पहचान करते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती है और जिन्हें पैसों की जरूरत होती है। उन्हें छोटी रकम का लालच देकर बीमा पॉलिसी करवाने के लिए तैयार किया जाता है। कई मामलों में परिजनों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के मामलों में फर्जी दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्रों में हेरफेर जैसी गतिविधियां भी हो सकती हैं, जिससे बीमा क्लेम आसानी से पास हो सके। हालांकि, अभी तक इस पूरे नेटवर्क की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संबंधित विभागों ने मामले की जांच शुरू करने के संकेत दिए हैं।

बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल वित्तीय धोखाधड़ी को बढ़ावा देती हैं, बल्कि असली जरूरतमंद बीमा धारकों के लिए भी नुकसानदायक साबित होती हैं। इससे बीमा कंपनियों पर भरोसा कमजोर होता है और प्रीमियम दरों पर भी असर पड़ सकता है।

वहीं, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि कमजोर वर्ग के लोगों का शोषण बेहद चिंताजनक है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

फिलहाल, संबंधित राज्यों में प्रशासन और जांच एजेंसियां इस तरह के संदिग्ध बीमा क्लेम मामलों की पृष्ठभूमि खंगालने में जुटी हुई हैं। माना जा रहा है कि अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह बीमा क्षेत्र के बड़े घोटालों में से एक हो सकता है।