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12 साल पुराने रिश्वत मामले में बड़ा फैसला, वीडियो में जाने जहाजपुर थाने के तत्कालीन ASI को 4 साल की सजा; 15 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया

12 साल पुराने रिश्वत मामले में बड़ा फैसला, वीडियो में जाने जहाजपुर थाने के तत्कालीन ASI को 4 साल की सजा; 15 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया
 
12 साल पुराने रिश्वत मामले में बड़ा फैसला, वीडियो में जाने जहाजपुर थाने के तत्कालीन ASI को 4 साल की सजा; 15 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से जुड़े 12 साल पुराने रिश्वत मामले में एसीबी कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशिष्ट न्यायाधीश (एसीबी) पवन कुमार सिंघल की अदालत ने जहाजपुर थाने के तत्कालीन एएसआई कालू राम कहार को रिश्वत लेने के मामले में दोषी करार देते हुए 4 साल के कठोर कारावास और 15 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी एएसआई कालू राम कहार पुत्र नाहरा कहार, निवासी कलिंजरी गेट शाहपुरा को जमीन विवाद के मामले में कार्रवाई करने और चालान पेश करने के बदले रिश्वत मांगने का दोषी पाया गया।

जमीन विवाद की जांच के दौरान मांगी थी रिश्वत

विशिष्ट लोक अभियोजक कृष्ण कांत शर्मा ने बताया कि परिवादी रमेश चंद मीणा और उनके भाई फोरू लाल मीणा ने जहाजपुर थाने में एक जमीन विवाद को लेकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।शिकायत में बताया गया था कि उनकी करीब 10 बीघा जमीन पर पड़ोसी ने जबरन कब्जा कर लिया है। इस मामले की जांच तत्कालीन एएसआई कालू राम कहार कर रहे थे।जांच के दौरान आरोपी एएसआई ने मामले में कार्रवाई करने और जल्द चालान पेश करने के बदले रिश्वत की मांग की थी।

500 रुपए नकद और मुर्गे की भी की थी मांग

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी एएसआई ने परिवादी से रिश्वत के रूप में 500 रुपए नकद लिए थे। इसके अलावा शेष राशि और एक मुर्गा देने की मांग भी की गई थी।रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर एएसआई को दोषी माना।

एसीबी कोर्ट ने सुनाई सजा

मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद एसीबी कोर्ट के विशिष्ट न्यायाधीश पवन कुमार सिंघल ने फैसला सुनाते हुए आरोपी एएसआई कालू राम कहार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी ठहराया।अदालत ने आरोपी को 4 साल के कठोर कारावास के साथ 15 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश

इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि सरकारी पद पर रहते हुए रिश्वत मांगने वाले कर्मचारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।अधिकारियों ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी काम के बदले रिश्वत मांगता है तो इसकी शिकायत एसीबी को करें, ताकि भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।