राजस्थान में राशन वितरण में बड़ा बदलाव, वीडियो में देखें अब एटीएम से मिलेगा गेहूं, जयपुर समेत तीन जिलों में पायलट प्रोजेक्ट
नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (NFSA) से जुड़े परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें राशन की दुकान पर गेहूं लेने के लिए लंबी लाइनों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राज्य सरकार आने वाले महीनों में एक नई व्यवस्था शुरू करने जा रही है, जिसके तहत लाभार्थी अपने हिस्से का गेहूं एटीएम मशीन के जरिए कभी भी निकाल सकेंगे। इस नई पहल को “ग्रेन एटीएम” नाम दिया गया है।
खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार राशन वितरण प्रणाली को और अधिक सुगम, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसी कड़ी में अनाज वितरण के लिए ग्रेन एटीएम लगाए जाएंगे। शुरुआती चरण में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा, जिसमें जयपुर, बीकानेर और भरतपुर जिलों को शामिल किया गया है।
मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि जिस तरह बैंकिंग एटीएम से लोग 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन नकद निकाल सकते हैं, ठीक उसी तरह ग्रेन एटीएम भी 24×7 उपलब्ध रहेंगे। NFSA से जुड़े परिवार अपने सुविधाजनक समय पर एटीएम पर जाकर अपने कोटे का गेहूं प्राप्त कर सकेंगे। इससे न केवल लोगों का समय बचेगा, बल्कि राशन दुकानों पर लगने वाली भीड़ और अव्यवस्था भी कम होगी।
फिलहाल, राशन वितरण के लिए लोगों को तय तारीखों पर उचित मूल्य की दुकानों पर जाना पड़ता है, जहां कई बार लंबी कतारें लगती हैं। खासतौर पर बुजुर्गों, महिलाओं और मजदूर वर्ग के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना परेशानी का सबब बनता है। ग्रेन एटीएम की व्यवस्था लागू होने से इन समस्याओं से काफी हद तक निजात मिलने की उम्मीद है।
सरकार का दावा है कि यह प्रणाली पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होगी। लाभार्थियों की पहचान आधार या राशन कार्ड के जरिए की जाएगी और मशीन से उतना ही गेहूं मिलेगा, जितना उनके कोटे में निर्धारित है। इससे गड़बड़ी, कटौती और कालाबाजारी पर भी अंकुश लगेगा। साथ ही, यह व्यवस्था राशन डीलरों पर निर्भरता को भी कम करेगी।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इस योजना को प्रदेश के अन्य जिलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सरकार यह भी देखेगी कि ग्रेन एटीएम के संचालन, रखरखाव और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को कैसे प्रभावी ढंग से संभाला जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली में एक बड़ा तकनीकी बदलाव साबित हो सकता है। इससे न केवल आम लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता भी बढ़ेगी।
