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भड़ाना को पहले से थी हत्या की आशंका, सुरक्षा में तैनात थे 30 गार्ड; हमले के दौरान छोड़कर भागे, सीक्रेट मीटिंग में कहा था- उसका काल आ गया है

 
भड़ाना को पहले से थी हत्या की आशंका, सुरक्षा में तैनात थे 30 गार्ड; हमले के दौरान छोड़कर भागे, सीक्रेट मीटिंग में कहा था- उसका काल आ गया है

पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या के मामले में कई चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भड़ाना को अपनी हत्या की आशंका थी और उनकी सुरक्षा में करीब 30 गार्ड तैनात थे। इसके बावजूद हमले के दौरान सुरक्षा में लगे लोगों के उन्हें छोड़कर भागने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि एक गोपनीय बैठक में भी उनके खिलाफ खतरे को लेकर चर्चा हुई थी, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि “उसका काल आ गया है।” इन दावों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

हत्या की आशंका के बावजूद नहीं बच सकी जान

पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या ने राजस्थान में कानून-व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार, भड़ाना को पहले से अपनी जान को खतरा होने की आशंका थी। इसी वजह से उनकी सुरक्षा में बड़ी संख्या में गार्ड तैनात होने की बात कही जा रही है।

हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद हमले के दौरान उनकी जान नहीं बच सकी। घटना के समय सुरक्षा में तैनात लोगों ने क्या भूमिका निभाई और वे किन परिस्थितियों में मौके से हटे, यह जांच का अहम विषय हो सकता है। इन पहलुओं पर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

हमले के दौरान गार्डों के भागने का दावा

मामले से जुड़ी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमले के समय सुरक्षा में तैनात गार्ड पूर्व विधायक को छोड़कर भाग गए। यदि इसकी पुष्टि होती है, तो सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल उठ सकते हैं।

जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गार्डों की तैनाती किस व्यवस्था के तहत की गई थी, हमले के समय वे कहां मौजूद थे और उन्होंने बचाव के लिए क्या कदम उठाए। साथ ही, घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान और उपलब्ध साक्ष्य घटनाक्रम को समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

सीक्रेट मीटिंग में कही गई थी यह बात

रिपोर्ट में एक गोपनीय बैठक का भी जिक्र है, जिसमें कथित तौर पर भड़ाना को लेकर कहा गया था कि “उसका काल आ गया है।” इस कथन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बैठक कब हुई, उसमें कौन-कौन शामिल था और यह टिप्पणी किस संदर्भ में की गई थी, इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

यदि बैठक में किसी संभावित हमले या खतरे से संबंधित चर्चा हुई थी, तो जांच एजेंसियों के लिए उसके विवरण की पड़ताल करना महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, केवल कथित बयान के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका या साजिश में संलिप्तता तय नहीं की जा सकती।

जांच में सामने आएंगे अहम सवालों के जवाब

पूर्व विधायक की हत्या के मामले में सुरक्षा व्यवस्था, हमले की परिस्थितियों और संभावित साजिश से जुड़े पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण है। यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि भड़ाना को पहले से किसी तरह की धमकी मिली थी या नहीं और यदि मिली थी, तो उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई थी या नहीं।

फिलहाल, 30 गार्डों की तैनाती, हमले के दौरान उनके कथित तौर पर भागने और गोपनीय बैठक में कही गई बात जैसे दावों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगा कि घटना के पीछे क्या परिस्थितियां थीं और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं चूक हुई थी या नहीं।