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ढूंढ़ाड़ की परंपरा 35 किलो सोने के गहनों से सजे बाल-स्वरूप ठाकुरजी-राधारानी, वीडियो में देखें 400 किलो की चांदी की पालकी में की 6 कोस परिक्रमा

ढूंढ़ाड़ की परंपरा 35 किलो सोने के गहनों से सजे बाल-स्वरूप ठाकुरजी-राधारानी, वीडियो में देखें 400 किलो की चांदी की पालकी में की 6 कोस परिक्रमा
 
ढूंढ़ाड़ की परंपरा 35 किलो सोने के गहनों से सजे बाल-स्वरूप ठाकुरजी-राधारानी, वीडियो में देखें 400 किलो की चांदी की पालकी में की 6 कोस परिक्रमा

ढूंढ़ाड़ की रियासतकालीन परंपरा और आस्था का प्रतीक मानी जाने वाली श्री गोपालजी महाराज की 207वीं हेड़े की परिक्रमा शुक्रवार को भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुई। सैकड़ों वर्षों से चली आ रही यह परिक्रमा न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक भी है।

सुबह आरती के साथ हुई शुरुआत

शुक्रवार तड़के सुबह 6 बजे आरती और जयकारों की गूंज के बीच परिक्रमा का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं की भीड़ ने गोपालजी महाराज के दर्शन किए और जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। परिक्रमा का मार्ग परंपरागत रूप से श्री नृसिंहजी के मंदिर से शुरू हुआ। यहां से भक्तगण भगवान का स्मरण करते हुए शोभायात्रा के रूप में आगे बढ़े।

परकोटे के बाजारों से गुज़री परिक्रमा

दोपहर से शाम तक परिक्रमा का सिलसिला चलता रहा। जैसे ही शोभायात्रा सांगानेरी गेट पहुंची, वहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और भजनों के साथ शोभायात्रा परकोटे के ऐतिहासिक बाजारों से होकर गुज़री। जगह-जगह स्थानीय लोगों ने स्वागत द्वार बनाकर परिक्रमा का अभिनंदन किया। फूलों की वर्षा और प्रसाद वितरण से पूरा माहौल और अधिक भक्तिमय हो गया।

निज मंदिर में हुआ समापन

शाम को परिक्रमा वापस निज मंदिर पहुंची, जहां विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंदिर प्रांगण में भजन-संकीर्तन और आरती के साथ आयोजन का समापन हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

आस्था और परंपरा का संगम

हेड़े की परिक्रमा ढूंढ़ाड़ अंचल की एक अनूठी परंपरा है। ऐतिहासिक दृष्टि से यह परिक्रमा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और आस्था का प्रतीक भी है। मान्यता है कि इस परिक्रमा में शामिल होने से परिवार और समाज में सुख-समृद्धि आती है।

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

आयोजन में न केवल स्थानीय लोग बल्कि दूर-दराज़ से आए भक्त भी शामिल हुए। जयपुर, सीकर, दौसा और टोंक सहित विभिन्न जिलों से आए श्रद्धालुओं ने परिक्रमा में भाग लेकर अपनी आस्था प्रकट की। कई जगह महिलाओं और बच्चों ने भी भक्ति भाव से परिक्रमा में हिस्सा लिया।

प्रशासन और व्यवस्था

बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए थे। पुलिस और स्वयंसेवकों ने परिक्रमा मार्ग पर सुरक्षा और यातायात की व्यवस्था संभाली। मेडिकल टीमें और जलपान केंद्र भी मार्ग में लगाए गए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो।