जयपुर में बाबा उमाकांत महाराज की अपील: गो-हत्या पर देशव्यापी कानून बने, वीडियो में जाने युवाओं को नशामुक्त और आध्यात्मिक जीवन अपनाने का दिया संदेश
राजधानी जयपुर के ठिकरिया स्थित जयगुरुदेव आश्रम में आयोजित गुरु पूर्णिमा के तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान जयगुरुदेव पंथ के प्रमुख संत बाबा उमाकांत महाराज ने गो-हत्या पर देशव्यापी कानून बनाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि देशभर में गो-हत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ पत्रकारों और बुद्धिजीवियों को भी आगे आना चाहिए तथा इस संबंध में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और राष्ट्रपति से कानून बनाने की अपील करनी चाहिए। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बाबा उमाकांत महाराज ने समाज में बढ़ते नशे, हिंसा और नैतिक पतन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं से निपटने के लिए युवाओं को अच्छी संगत, सत्संग और आध्यात्मिक वातावरण से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
गो-हत्या पर कानून बनाने की अपील
अपने संबोधन में बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि गो-हत्या जैसे मुद्दे पर पूरे देश में एक समान कानून होना चाहिए। उन्होंने विभिन्न सामाजिक वर्गों से इस विषय पर जनजागरण अभियान चलाने और केंद्र सरकार से प्रभावी कानून बनाने की मांग करने का आग्रह किया।उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है।
युवाओं को दिया नशामुक्त जीवन का संदेश
बाबा उमाकांत महाराज ने युवाओं से नशे और बुरी संगत से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि सही खानपान, शाकाहार, सदाचार और आध्यात्मिक जीवन अपनाने से व्यक्ति का चरित्र मजबूत होता है और समाज में सकारात्मक बदलाव आता है।उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी यदि आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाएगी तो समाज में अपराध, हिंसा और नैतिक गिरावट जैसी कई समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
'मनुष्य जीवन का उद्देश्य मोक्ष प्राप्त करना'
संत उमाकांत महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएं प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवात्मा को परमात्मा से जोड़कर मुक्ति और मोक्ष प्राप्त करना है। उन्होंने इसे सनातन जीवन दर्शन का मूल आधार बताते हुए श्रद्धालुओं से ईश्वर भक्ति, सेवा और साधना को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जीवन व्यक्ति को आत्मिक शांति, संयम और सही दिशा प्रदान करता है।
साधना शिविरों के माध्यम से जागरूकता
बाबा उमाकांत महाराज ने बताया कि लोगों में आध्यात्मिक चेतना बढ़ाने के उद्देश्य से देशभर में नियमित रूप से साधना और नामधुनी शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों के माध्यम से लोगों को नशामुक्त, शाकाहारी और अनुशासित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।उन्होंने विश्वास जताया कि यदि समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ेगी तो लोगों में सद्बुद्धि का विकास होगा और अनेक सामाजिक समस्याओं का समाधान स्वतः संभव हो सकेगा।गुरु पूर्णिमा के इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और संत के संदेशों को सुनकर आध्यात्मिक जीवन, नैतिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव को अपनाने का संकल्प लिया।
