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11 साल में दूसरी सबसे कम रही अगस्त की बारिश, 2025 में प्रदेश में दर्ज हुई सिर्फ 66.2 MM वर्षा

11 साल में दूसरी सबसे कम रही अगस्त की बारिश, 2025 में प्रदेश में दर्ज हुई सिर्फ 66.2 MM वर्षा
 
11 साल में दूसरी सबसे कम रही अगस्त की बारिश, 2025 में प्रदेश में दर्ज हुई सिर्फ 66.2 MM वर्षा

मानसून के सीजन में इस बार अगस्त महीने में प्रदेश में बारिश का आंकड़ा काफी कम रहा है। वर्ष 2015 से 2025 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो अगस्त में सबसे कम बारिश वर्ष 2023 में दर्ज की गई थी। उस साल पूरे प्रदेश में केवल 30.9 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इसके बाद वर्ष 2025 में अगस्त महीने में 66.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो पिछले 11 सालों में दूसरी सबसे कम बारिश है।

बारिश के आंकड़े इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि अगस्त महीने में मानसून की सक्रियता अपेक्षाकृत कमजोर रही। सामान्य तौर पर अगस्त को मानसून का प्रमुख महीना माना जाता है, लेकिन इस बार कई इलाकों में अपेक्षित बारिश नहीं हो सकी।

2023 में सबसे कम हुई थी बारिश

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में अगस्त महीने में सबसे कम बारिश वर्ष 2023 में हुई थी। उस दौरान प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां कमजोर रहने के कारण पूरे महीने में सिर्फ 30.9 MM बारिश दर्ज की गई थी।

इसके बाद वर्ष 2025 में अगस्त की बारिश का आंकड़ा 66.2 MM रहा। यह पिछले 11 वर्षों में दूसरा सबसे कम आंकड़ा है। कम बारिश का असर प्रदेश के कई हिस्सों में दिखाई दिया, जहां किसानों और आम लोगों को मौसम की अनिश्चितता का सामना करना पड़ा।

मानसून की कमजोर गतिविधियों का असर

अगस्त में कम बारिश के पीछे मानसूनी सिस्टम की कमजोर सक्रियता को प्रमुख कारण माना जा रहा है। कई बार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से बनने वाले सिस्टम प्रदेश तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंचा पाए, जिससे बारिश का सिलसिला कमजोर रहा।

मानसून के दौरान बारिश का वितरण भी महत्वपूर्ण होता है। कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई, जबकि कई इलाके कम बारिश से प्रभावित रहे। यही वजह है कि पूरे प्रदेश के औसत आंकड़ों में अगस्त की बारिश काफी कम दर्ज हुई।

किसानों की बढ़ी चिंता

अगस्त महीने में कम बारिश का असर सबसे ज्यादा खेती पर देखने को मिलता है। खरीफ फसलों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से फसलों की सिंचाई और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहती है।

किसानों को कई बार अतिरिक्त सिंचाई का सहारा लेना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ जाती है। मौसम में बदलाव और बारिश की अनिश्चितता किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

मौसम विभाग की नजर मानसून पर

हालांकि अगस्त में बारिश कम रही, लेकिन मानसून सीजन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मौसम विभाग लगातार प्रदेश में बनने वाले मौसम सिस्टम पर नजर बनाए हुए है। सितंबर में अगर अच्छी बारिश होती है तो मानसून की कुल कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश का आंकड़ा केवल एक महीने के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि पूरे मानसून सीजन के कुल प्रदर्शन को ध्यान में रखना जरूरी है।

फिलहाल अगस्त 2025 की बारिश ने पिछले 11 वर्षों का एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड दर्ज किया है। वर्ष 2023 के बाद अब यह दूसरा सबसे कम बारिश वाला अगस्त साबित हुआ है। आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियां प्रदेश में बारिश की स्थिति को तय करेंगी।