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ईरानी युद्धपोत पर हमला, गहलोत बोले ‘जी हुजूरी’ ठीक नहीं, रणनीतिक चुप्पी भारत की साख पर उठा रही सवाल

ईरानी युद्धपोत पर हमला, गहलोत बोले ‘जी हुजूरी’ ठीक नहीं, रणनीतिक चुप्पी भारत की साख पर उठा रही सवाल
 
ईरानी युद्धपोत पर हमला, गहलोत बोले ‘जी हुजूरी’ ठीक नहीं, रणनीतिक चुप्पी भारत की साख पर उठा रही सवाल

ईरानी युद्धपोत पर हुए हमले को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। इस मामले में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने केंद्र सरकार की रणनीतिक चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत की भूमिका हमेशा संतुलित और प्रभावी रही है, लेकिन इस तरह की घटनाओं पर अत्यधिक चुप्पी देश की साख को प्रभावित कर सकती है।

अशोक गहलोत ने अपने बयान में कहा कि विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर “जी हुजूरी” की राजनीति ठीक नहीं है। उनका कहना है कि भारत जैसे बड़े और प्रभावशाली देश को वैश्विक मुद्दों पर स्पष्ट और संतुलित रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर सरकार की चुप्पी कई बार गलत संदेश देती है और इससे देश की कूटनीतिक प्रतिष्ठा पर सवाल उठ सकते हैं।

गहलोत ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा से स्वतंत्र और संतुलित रही है। दुनिया में भारत की पहचान एक जिम्मेदार और प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में है, इसलिए ऐसे संवेदनशील मामलों पर देश की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इस मुद्दे पर अपना रुख साफ करे ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की विश्वसनीयता बनी रहे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ऐसे मामलों पर भारत की प्रतिक्रिया को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। भारत के कई देशों के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं, इसलिए हर बयान और कूटनीतिक कदम को संतुलन के साथ उठाना पड़ता है।

इस बीच केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर इस मुद्दे पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि विदेश नीति से जुड़े मामलों में अक्सर सरकार सावधानीपूर्वक बयान देती है, ताकि किसी भी देश के साथ संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

गहलोत के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि वैश्विक मुद्दों पर भारत की भूमिका स्पष्ट और प्रभावशाली होनी चाहिए, जबकि सरकार समर्थक नेताओं का तर्क है कि कूटनीतिक मामलों में कई बार रणनीतिक चुप्पी भी जरूरी होती है।

फिलहाल ईरानी युद्धपोत पर हमले की घटना और उस पर भारत की प्रतिक्रिया को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर चर्चा जारी है। आने वाले समय में केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में क्या रुख सामने आता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।