मानेसर एपिसोड पर फिर बोले अशोक गहलोत, कहा- विधायकों को दिए गए थे प्रलोभन, लेकिन हमने सरकार बचा ली
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने एक बार फिर साल 2020 के चर्चित 'मानेसर एपिसोड' को याद करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। गहलोत ने दावा किया कि उस समय उनकी सरकार को गिराने के लिए कांग्रेस विधायकों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन दिए गए थे, लेकिन कांग्रेस ने एकजुटता बनाए रखी और सरकार को बचाने में सफल रही।
जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने कहा कि 2020 का राजनीतिक संकट राजस्थान की लोकतांत्रिक राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय था, जिसे वे आज भी भूले नहीं हैं।
"विधायकों को तोड़ने की कोशिश हुई"
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि उस समय कांग्रेस के विधायकों को पार्टी छोड़ने और सरकार के खिलाफ जाने के लिए प्रलोभन दिए गए थे। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन के लिए हर संभव कोशिश की गई, लेकिन कांग्रेस के अधिकांश विधायक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहे।
गहलोत ने कहा कि उस दौर में कई तरह की राजनीतिक गतिविधियां हुईं, लेकिन जनता द्वारा चुनी गई सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों को सफल नहीं होने दिया गया।
मानेसर बना था सियासी गतिविधियों का केंद्र
साल 2020 में राजस्थान की राजनीति उस समय सुर्खियों में आई थी, जब कांग्रेस के कुछ विधायक हरियाणा के मानेसर में ठहरे हुए थे। उस दौरान राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और सरकार के भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही थीं।
गहलोत ने कहा कि उस समय जो घटनाक्रम हुआ, उसने लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए थे।
"बीजेपी अपने मकसद में सफल नहीं हुई"
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखा और राजनीतिक संकट का मजबूती से सामना किया। उन्होंने कहा, "हमने बीजेपी को अपने मकसद में सफल नहीं होने दिया और राजस्थान की सरकार को बचा लिया।"
गहलोत ने इसे कांग्रेस की एक बड़ी राजनीतिक जीत बताते हुए कहा कि पार्टी के नेताओं और विधायकों ने उस समय संयम और एकता का परिचय दिया था।
फिर गरमाई 2020 की सियासत
राज्यसभा चुनाव और वर्तमान राजनीतिक गतिविधियों के बीच गहलोत के इस बयान ने एक बार फिर 2020 के सियासी घटनाक्रम को चर्चा में ला दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजस्थान की राजनीति में मानेसर एपिसोड अब भी एक संवेदनशील और चर्चित विषय बना हुआ है।
हालांकि, इन आरोपों पर भाजपा की ओर से कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन गहलोत के बयान ने एक बार फिर उस दौर की राजनीतिक खींचतान को सुर्खियों में ला दिया है।
चुनावी माहौल में बढ़ी बयानबाजी
राजस्थान में राज्यसभा चुनाव और संगठनात्मक गतिविधियों के बीच नेताओं के बयान लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। अशोक गहलोत का यह बयान भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वे बार-बार 2020 के घटनाक्रम का उल्लेख कर कांग्रेस की एकजुटता और अपनी सरकार को बचाने के प्रयासों को याद दिलाते रहे हैं।
