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अशोक गहलोत का सरकार पर हमला, ‘इंतजारशास्त्र’ से जनता को नुकसान, वीडियो में देंखे गांधी संस्थान को लेकर उठाए सवाल

अशोक गहलोत का सरकार पर हमला, ‘इंतजारशास्त्र’ से जनता को नुकसान, वीडियो में देंखे गांधी संस्थान को लेकर उठाए सवाल
 
अशोक गहलोत का सरकार पर हमला, ‘इंतजारशास्त्र’ से जनता को नुकसान, वीडियो में देंखे गांधी संस्थान को लेकर उठाए सवाल

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार के कामकाज पर तीखा तंज कसते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 के बाद से प्रदेश में एक अजीबोगरीब “इंतजारशास्त्र” चल रहा है, जिसके कारण विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई है।गहलोत के अनुसार, पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान शुरू किए गए कई जनहितकारी प्रोजेक्ट्स को जानबूझकर धीमा कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस देरी की वजह से न केवल परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है, बल्कि आम जनता अपने अधिकारों और सुविधाओं से भी वंचित हो रही है। उनका कहना है कि विकास कार्यों में इस तरह की सुस्ती प्रदेश के भविष्य के लिए चिंता का विषय है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से जयपुर के जेएलएन मार्ग स्थित “महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंसेज” का जिक्र करते हुए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस संस्थान की भव्य इमारत वर्ष 2024 में ही पूरी तरह बनकर तैयार हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद सरकार इसे अभी तक शुरू करने से बच रही है।गहलोत ने सरकार से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि क्या इस उत्कृष्ट संस्थान को केवल इसलिए शुरू नहीं किया जा रहा है क्योंकि यह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक बताते हुए कहा कि इस तरह की सोच विकास के रास्ते में बाधा बन रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस संस्थान का उद्देश्य प्रशासनिक और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट शिक्षा और शोध को बढ़ावा देना था, जिससे राज्य के युवाओं को लाभ मिल सकता था। लेकिन इसके क्रियान्वयन में हो रही देरी से यह अवसर फिलहाल अधर में लटका हुआ है।गहलोत के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। उनके आरोपों को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा जरूर शुरू हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से राजनीतिक माहौल और गर्म हो सकता है, लेकिन वास्तविक सवाल यह है कि लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा कर जनता को उनका लाभ कब मिलेगा। फिलहाल, अशोक गहलोत के इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में एक नया मुद्दा खड़ा कर दिया है, और आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।