टोंक के आशीष जैन का हथकरघा उद्योग बना रोजगार का जरिया, 150 लोगों को मिला काम
टोंक जिले के आवां कस्बे में आशीष जैन का हथकरघा उद्योग अब स्थानीय स्तर पर रोजगार का बड़ा जरिया बन गया है। इस उद्योग से न केवल आशीष जैन को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिली, बल्कि टोंक सहित बारां, अजमेर और झालावाड़ जैसे जिलों के करीब 150 लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। खास बात यह है कि इनमें करीब 100 महिलाएं शामिल हैं।
आशीष जैन ने हथकरघा उद्योग की शुरुआत कर धीरे-धीरे इसे विस्तार दिया। आज यह काम कई परिवारों की आजीविका का साधन बन चुका है। अलग-अलग जिलों में जुड़े कारीगर और श्रमिक हथकरघे से संबंधित काम कर रहे हैं। इससे ग्रामीण और छोटे कस्बाई क्षेत्रों में लोगों को अपने घर और आसपास के क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
हथकरघा उद्योग में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय है। करीब 100 महिलाएं इस काम से जुड़ी हुई हैं। इससे उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और परिवार की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है। घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ महिलाएं इस काम को कर अपनी आमदनी का जरिया बना रही हैं।
आशीष जैन के अनुसार, इस काम को आगे बढ़ाने के पीछे आचार्य स्वर्गीय विद्यासागर जी महाराज और मुनि सुधा सागर जी महाराज की प्रेरणा महत्वपूर्ण रही है। उनके विचारों और मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने स्वावलंबन और रोजगार सृजन की दिशा में काम आगे बढ़ाया।
हथकरघा उद्योग से तैयार होने वाले उत्पादों की मांग के चलते काम का दायरा लगातार बढ़ा है। स्थानीय कारीगरों को काम मिलने के साथ पारंपरिक हुनर को भी बढ़ावा मिल रहा है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि ऐसे स्थानीय उद्योगों को बाजार और उचित प्रोत्साहन मिले तो रोजगार के और अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
आवां कस्बे में शुरू हुआ यह प्रयास अब कई जिलों तक पहुंच चुका है। एक व्यक्ति से शुरू हुआ काम आज 150 लोगों की आजीविका से जुड़ गया है। इनमें बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी यह बताती है कि छोटे स्तर पर शुरू किए गए स्थानीय उद्योग भी रोजगार के मजबूत माध्यम बन सकते हैं।
आशीष जैन का हथकरघा उद्योग अब टोंक जिले के साथ आसपास के जिलों में भी आत्मनिर्भरता और रोजगार का उदाहरण बन रहा है। इससे जुड़े लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में उद्योग का विस्तार होगा और और अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ा जा सकेगा।
