रेगिस्तान में बनी ‘आर्टिफिशियल झील’ वीडियो में देंखे जैसलमेर में 28 किमी लंबा जलभंडार, अब सालभर मिलेगा पानी
राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में पानी की समस्या से निपटने के लिए एक बड़ी और अनोखी पहल सामने आई है। जैसलमेर में विशाल आर्टिफिशियल झील तैयार की गई है, जिसे राज्य के जल प्रबंधन की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। जलदाय विभाग का दावा है कि इस परियोजना से जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में पूरे 365 दिन पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।रेगिस्तान के बीच तैयार की गई यह कृत्रिम झील करीब 28 किलोमीटर लंबी और लगभग 33 फीट गहरी है। इसकी विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दावा किया जा रहा है कि झील को एक छोर से दूसरे छोर तक पार करने में लगभग 24 घंटे का समय लग सकता है।
जलदाय विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस झील में इंदिरा गांधी नहर से आने वाले बारिश के अतिरिक्त पानी को स्टोर किया जाएगा। बाद में इस पानी को फिल्टर प्लांट के जरिए शुद्ध कर जैसलमेर और बाड़मेर के घरों तक पहुंचाया जाएगा।सबसे खास बात यह है कि रेगिस्तानी मिट्टी पानी को सोख न ले, इसके लिए झील के तल में विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। झील के नीचे 300 माइक्रोन की स्पेशल प्लास्टिक शीट बिछाई गई है, जो पानी को जमीन में रिसने से रोकती है। इससे लंबे समय तक पानी सुरक्षित रखा जा सकेगा।
अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना आने वाले समय में पश्चिमी राजस्थान के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। अनुमान है कि इस जलभंडार के जरिए करीब 50 लाख लोगों को पूरे साल लगातार पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में लंबे समय से पानी की कमी एक बड़ी चुनौती रही है। गर्मियों के मौसम में कई इलाकों में जल संकट गंभीर रूप ले लेता है। ऐसे में इस तरह की आधुनिक जल संरक्षण परियोजना को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में राज्य के अन्य सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भी इसी तरह की कृत्रिम झीलें विकसित की जा सकती हैं। इससे न केवल पेयजल संकट कम होगा, बल्कि जल संरक्षण और प्रबंधन को भी नई दिशा मिलेगी। फिलहाल यह परियोजना लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और इसे रेगिस्तान में “पानी की नई उम्मीद” के रूप में देखा जा रहा है।
