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क्या जयपुर में कबूतर लोगों के लिए ख़तरा बनते जा रहे हैं? स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया

क्या जयपुर में कबूतर लोगों के लिए ख़तरा बनते जा रहे हैं? स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया
 
क्या जयपुर में कबूतर लोगों के लिए ख़तरा बनते जा रहे हैं? स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया

राजधानी जयपुर में कबूतरों को दाना डालने की परंपरा और आस्था धीरे‑धीरे स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। शहर के कई मुख्य मार्गों, चौक‑चौराहों और खुले स्थानों पर कबूतरों की बढ़ती संख्या और लोगों द्वारा रोजाना उन्हें दाना खिलाने की गतिविधि को लेकर अब डॉक्टर्स ने संभावित स्वास्थ्य जोखिम का संकेत दिया है।

कबूतर क्यों हैं चिंता का कारण?

जयपुर के कई हिस्सों में हर किलोमीटर पर कबूतरों के बड़े‑बड़े समूह बन गए हैं, जहाँ श्रद्धालु और राहगीर उन्हें दाना खिलाते दिखते हैं। लोगों की यह निष्ठा और परंपरा सुबह‑शाम दाना डालने तक सीमित नहीं रही, बल्कि कबूतरों की संख्या बढ़ने और उनके मल‑मूत्र के फैलने से गंदगी और संक्रमित पदार्थों का जमाव भी बढ़ गया है।

डॉक्टर्स का एहतियात‑भरा बयान

एसएमएस अस्पताल के डॉक्टर अजित सिंह का कहना है कि शहर में सांस की तकलीफ, अस्थमा, और फेफड़ों से जुड़ी फंगल इंफेक्शन जैसी गंभीर बीमारियाँ बढ़ती जा रही हैं। इसके संभावित कारणों में कबूतरों के सूखे मल और उनके पंखों से उड़ने वाले सूक्ष्म फंगल कण भी शामिल हो सकते हैं, जो कि धूल‑मिट्टी के साथ हवा में फैलते हैं और जब लोग उन्हें साँस के रूप में लेते हैं, तो स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न कर सकते हैं।

इन बीमारियों के लक्षणों में लंबे समय तक खांसी, सांस फूलना, थकान और नाक बहना जैसी परेशानियाँ भी शामिल हैं, जो समय‑समय पर हॉस्पिटल में रिपोर्ट होने वाले रोगियों से संबंधित मामलों में सामने आ रही हैं।

नगर निगम और प्रशासन पर क्या जिम्मेदारी?

हालांकि जयपुर में कबूतर खिलाना लोगों की परंपरा और आस्था से जुड़ा रहा है, डॉक्टर्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अब यह सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा बन चुका है। उन्होंने नगर निगम और प्रशासन से अपील की है कि खुले सार्वजनिक स्थानों पर दाना डालने पर प्रतिबंध लगाने या कम‑से‑कम साफ‑सफाई के कड़े प्रबंध करने की आवश्यकता है ताकि संभावित संक्रमण और सांस की बीमारी का जोखिम कम किया जा सके।

क्या यह समस्या केवल जयपुर तक सीमित है?

जैसा कि विशेषज्ञों और सोशल मीडिया पर भी कुछ नागरिकों ने उल्लेख किया है, कबूतरों की बढ़ती संख्या और उनसे जुड़ी गंदगी कई शहरों में स्वास्थ्य और साफ‑सफाई पर असर डाल रही है, लेकिन जयपुर जैसी बड़ी नगरी में इस विषय पर लोगों की प्रतिक्रिया और प्रशासन की सक्रियता दोनों ही अधिक मायने रखते हैं।

 
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