जयपुर में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, वीडियो में जाने नियमितिकरण और मानदेय बढ़ाने की मांग; पुलिस ने हिरासत में लेकर छोड़ा
राजस्थान की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने सोमवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर राजधानी जयपुर में जोरदार प्रदर्शन किया। महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशालय और शासन सचिवालय के बाहर बड़ी संख्या में जुटीं आंगनवाड़ी कर्मियों ने नियमितिकरण, मानदेय में वृद्धि और गैर-आईसीडीएस कार्यों से मुक्ति की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारी महिलाओं को हिरासत में लेकर गांधीनगर थाने पहुंचाया। बाद में सभी को छोड़ दिया गया और वे अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो गईं।
1 जुलाई से जारी है आंदोलन
अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के आह्वान पर आंगनवाड़ी कर्मियों का आंदोलन 1 जुलाई से लगातार जारी है।आंदोलन के पहले चरण में 1 से 6 जुलाई तक कार्य बहिष्कार किया गया। इसके बाद 7 से 18 जुलाई तक आम हड़ताल और आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताला बंदी कर विरोध जताया गया। इस दौरान सरकार और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन सभी कर्मचारी इससे संतुष्ट नहीं हैं।
समझौते पर जताई नाराजगी
प्रदर्शन में शामिल कई आंगनवाड़ी कर्मियों ने हाल ही में हुए समझौते पर असंतोष जताया। उनका कहना है कि समझौते में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मानदेय में कितनी बढ़ोतरी की जाएगी।प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अन्य राज्यों से की तुलना
आंदोलनकारी कर्मियों ने कहा कि देश के कई राज्यों में आंगनवाड़ी कर्मचारियों को राजस्थान की तुलना में कहीं अधिक मानदेय दिया जा रहा है।उनके अनुसार, मध्य प्रदेश, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को 11 हजार से 20 हजार रुपये तक मानदेय मिलता है, जबकि राजस्थान में उन्हें केवल 6,500 से 10,500 रुपये के बीच ही भुगतान किया जाता है।कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में वर्तमान मानदेय से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द सम्मानजनक मानदेय तय करना चाहिए।
ये हैं प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी आंगनवाड़ी कर्मियों ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें—
- आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का नियमितिकरण।
- मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि।
- आंगनवाड़ी कर्मियों से गैर-आईसीडीएस (ICDS) कार्य नहीं करवाना।
- लंबित मांगों पर स्पष्ट और लिखित आदेश जारी करना।
सरकार के फैसले का इंतजार
फिलहाल आंगनवाड़ी कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। वहीं, महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से इस नए प्रदर्शन पर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।प्रदेशभर में हजारों आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रही हैं। उनके आंदोलन का असर कई स्थानों पर आंगनवाड़ी सेवाओं पर भी देखने को मिल रहा है।
