श्रीगंगानगर में फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़े का आरोप, एक ही खेत की एक फसल पर 3 बार लिया खराबा क्लेम
श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक किसान ने एक ही खेत में एक ही फसल के नुकसान का तीन अलग-अलग बार क्लेम उठाकर बीमा राशि हासिल कर ली। मामला सामने आने के बाद कृषि और बीमा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि फसल खराबे के नाम पर एक ही खेत और एक ही फसल के लिए बार-बार क्लेम किए गए। इससे सरकारी योजना के तहत किसानों को मिलने वाली बीमा राशि के दुरुपयोग की आशंका पैदा हुई है।
एक ही खेत में तीन बार लिया क्लेम
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि कथित तौर पर एक ही खेत में एक ही फसल के नुकसान को आधार बनाकर तीन बार क्लेम उठाया गया।
फसल खराब होने पर किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा मिलता है। लेकिन एक ही नुकसान के लिए बार-बार राशि हासिल किए जाने का मामला सामने आने से योजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
लाखों रुपये के फर्जीवाड़े की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस मामले में लाखों रुपये की अनियमितता की आशंका जताई जा रही है। हालांकि कुल कितनी राशि का भुगतान हुआ और इस प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद सामने आएगी।
अधिकारियों की ओर से रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाया जा सकता है कि संबंधित खेत, फसल और किसान के नाम पर कितनी बार क्लेम दर्ज किया गया।
रिकॉर्ड की जांच से खुलेगा पूरा मामला
फर्जीवाड़े की पुष्टि के लिए फसल बीमा से जुड़े दस्तावेज, गिरदावरी रिकॉर्ड, खेत का विवरण और क्लेम भुगतान की जानकारी का मिलान किया जाएगा।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि तीनों क्लेम के समय फसल खराबे का आकलन किस आधार पर किया गया था और अलग-अलग मौकों पर एक ही खेत की फसल को नुकसानग्रस्त कैसे दर्ज किया गया।
योजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा या अन्य निर्धारित कारणों से फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है। ऐसे में यदि एक ही नुकसान के लिए बार-बार क्लेम पास हुआ है तो यह निगरानी व्यवस्था की गंभीर खामी मानी जाएगी।
मामला सामने आने के बाद संबंधित विभागों से जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ सकती है। यदि जांच में फर्जीवाड़ा साबित होता है तो गलत तरीके से हासिल की गई राशि की वसूली के साथ जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
फिलहाल सूरतगढ़ में सामने आए इस मामले ने फसल बीमा योजना के क्लेम सिस्टम और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि तीन बार क्लेम कैसे पास हुआ और इस पूरे मामले में कितने लोगों की भूमिका थी।
