AI बताएगा आर्टरी में कितने MM का लगेगा स्टेंट, एंजियोप्लास्टी के दौरान ब्लॉकेज की मिलेगी सटीक जानकारी
दिल की नसों में ब्लॉकेज का इलाज करने वाली एंजियोप्लास्टी में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से स्टेंट का सही साइज तय करने में सहायता मिल रही है। नई तकनीक नस के अंदर की हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरों का विश्लेषण कर ब्लॉकेज की स्थिति, आकार और बनावट की जानकारी देती है। इससे डॉक्टर को यह तय करने में मदद मिलती है कि किस जगह कितने मिलीमीटर (MM) का स्टेंट लगाया जाना उपयुक्त होगा।
नस के अंदर की तस्वीरों से मिलेगी सटीक जानकारी
पारंपरिक एंजियोग्राफी में एक्स-रे की मदद से रक्त वाहिकाओं में ब्लॉकेज की पहचान की जाती है। इसके अलावा, नस के अंदर की विस्तृत तस्वीरें लेने के लिए OCT (ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी) और IVUS (इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
AI आधारित सॉफ्टवेयर इन तस्वीरों का विश्लेषण करके नस के व्यास, ब्लॉकेज की लंबाई और प्लाक की बनावट का आकलन करने में मदद करता है। इससे डॉक्टर को स्टेंट का सही आकार चुनने और उसे उचित जगह पर लगाने की योजना बनाने में सहायता मिलती है।
क्या है नई तकनीक की खासियत?
नई AI आधारित इमेजिंग तकनीक के प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:
- स्टेंट के साइज का आकलन: नस के व्यास के आधार पर सही आकार चुनने में डॉक्टर को मदद मिलती है।
- ब्लॉकेज की बेहतर पहचान: नस में जमा प्लाक की स्थिति, लंबाई और बनावट का विस्तृत आकलन किया जा सकता है।
- स्टेंट की सही पोजिशनिंग: ब्लॉकेज वाले हिस्से को उचित तरीके से कवर करने की योजना बनाने में मदद मिलती है।
- इलाज के बाद जांच: स्टेंट लगाने के बाद यह आकलन किया जा सकता है कि स्टेंट सही तरीके से खुला है या नहीं और रक्त प्रवाह में सुधार हुआ है या नहीं।
जटिल ब्लॉकेज में भी मिल सकती है मदद
कुछ मरीजों की नसों में ब्लॉकेज ज्यादा लंबा, गंभीर या कैल्शियम जमा होने के कारण सख्त होता है। ऐसे मामलों में स्टेंट का सही आकार और उसकी स्थिति तय करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।AI आधारित इमेजिंग डॉक्टर को ब्लॉकेज की बनावट समझने और इलाज की बेहतर योजना बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि, इसका लाभ मरीज की स्थिति, ब्लॉकेज के प्रकार और इस्तेमाल की जा रही तकनीक पर निर्भर करता है।
अंतिम फैसला डॉक्टर का ही होगा
AI स्टेंट का साइज तय करने में मददगार तकनीक है, लेकिन यह डॉक्टर की जगह नहीं लेती। स्टेंट का व्यास और लंबाई तय करते समय नस की बनावट, ब्लॉकेज की स्थिति, मरीज की अन्य बीमारियों और इमेजिंग रिपोर्ट को ध्यान में रखा जाता है।इस तकनीक का उद्देश्य इलाज में सटीकता बढ़ाना और स्टेंट लगाने के दौरान बेहतर निर्णय लेने में मदद करना है। किसी मरीज के लिए स्टेंट जरूरी है या नहीं और कौन-सा साइज उपयुक्त होगा, इसका निर्णय विशेषज्ञ हृदय रोग चिकित्सक ही करते हैं।
