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पंचायत चुनाव की तारीखों से पहले गांवों में बढ़ी सियासी सरगर्मी, सरपंच पद के लिए 1 करोड़ का किया ऐलान

पंचायत चुनाव की तारीखों से पहले गांवों में बढ़ी सियासी सरगर्मी, सरपंच पद के लिए 1 करोड़ का किया ऐलान
 
पंचायत चुनाव की तारीखों से पहले गांवों में बढ़ी सियासी सरगर्मी, सरपंच पद के लिए 1 करोड़ का किया ऐलान

राजस्थान में पंचायत चुनाव की घोषणा से पहले ही गांव के चौपालों में चुनावी माहौल अपने चरम पर पहुंच गया है। तारीखों का औपचारिक ऐलान भी नहीं हुआ है, लेकिन दावेदारों ने अपनी चालें चलनी शुरू कर दी हैं। इस चुनाव के शोर के बीच रविवार को हनुमानगढ़ जिले से ऐसी खबर आई जिसने सबको हैरान कर दिया। यहां एक दावेदार ने सरपंच पद के बदले विकास का "बंपर ऑफर" दिया है, जिसकी चर्चा पूरे राज्य में हो रही है।

निर्विरोध चुने जाने पर 1 करोड़ रुपये का डोनेशन
हनुमानगढ़ की नोहर तहसील का गोरखाना गांव इस समय राज्य की राजनीति का केंद्र बना हुआ है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) से जुड़े सोहन नेहरा ने सरपंच पद के लिए एक अनोखी और अहम घोषणा की है। नेहरा का कहना है कि अगर गांव वाले उन्हें एकमत से निर्विरोध चुनते हैं, तो वे गांव की गौशाला के विकास के लिए अपनी जेब से 1 करोड़ रुपये दान करेंगे। यह घोषणा सिर्फ बातें नहीं हैं, बल्कि कहा जा रहा है कि गांव वालों ने इस वादे की "गारंटी" भी मांगी है।

चुनाव खर्च बर्बाद करने से बेहतर है गांव का पुनरुद्धार।

अक्सर देखा जाता है कि पंचायत चुनाव में उम्मीदवार शराब, दावत और कैंपेनिंग पर बहुत पैसा खर्च करते हैं। सोहन नेहरा का तर्क है कि चुनाव लड़ने और गुटबाजी पर लाखों-करोड़ों खर्च करने से अच्छा है कि उस पैसे का इस्तेमाल सीधे गांव की भलाई के लिए किया जाए। उनका कहना है कि उनका मकसद राजनीति के ज़रिए पैसा कमाना नहीं, बल्कि सेवा करना है। अगर गांव वाले एकमत होकर उन्हें ज़िम्मेदारी सौंपते हैं, तो गोशाला का कायापलट उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

तारीखों से पहले ही "चुनावी खेल" शुरू
हालांकि राज्य चुनाव आयोग ने अभी कैलेंडर जारी नहीं किया है, लेकिन गोरखाना जैसे गांवों ने हलचल मचा दी है। ग्रामीण राजस्थान में बिना मुकाबले के चुनाव की परंपरा को बढ़ावा देने के लिए अक्सर ऐसे प्रस्ताव सामने आते हैं, लेकिन 1 करोड़ रुपये की इस बड़ी रकम ने इस बार मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। अब देखना यह है कि गांव वाले इस 'करोड़पति ऑफर' को स्वीकार करते हैं या चुनाव के मैदान में लोकतंत्र का पारंपरिक मुकाबला देखने को मिलता है।