बीकानेर में खेजड़ी बचाने का आंदोलन, वीडियो में देखें अनिश्चितकालीन अनशन तीसरे दिन भी जारी
खेजड़ी बचाने के लिए चल रहे आंदोलन में अनिश्चितकालीन अनशन तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। बिश्नोई धर्मशाला के सामने पब्लिक पार्क में 450 से ज्यादा पर्यावरण प्रेमी, संत और 50 महिलाएं अनशन पर डटी हुई हैं। अनशन पर बैठे धवा डोली मठ के महंत संत लाल दास की तबीयत इस दौरान और बिगड़ गई। उन्हें गंभीर स्थिति में पीबीएम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वहीं, कुछ आंदोलनकारी अपनी मांगों को मजबूती से रखने के लिए लोहे की रेलिंग से खुद को बांधकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
आंदोलन के नेतृत्वकर्ता सच्चिदानंद महाराज के अनुसार, बड़ी संख्या में संत इस अनशन में भाग ले रहे हैं। उन्होंने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “खुद को सनातनी कहने वाली सरकार निष्ठुर बन गई है। अन्न-जल त्यागकर बैठे लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। अगर कानून नहीं बना तो हालात और गंभीर हो जाएंगे। बस तारीख बता दो, आमरण अनशन तब तक जारी रहेगा।”
अनशन में भाग लेने वाले पर्यावरण प्रेमी महेंद्रकुमार ने आंखों पर पट्टी बांधकर अपनी भागीदारी जताई। आंदोलन के नेताओं का कहना है कि यह अनशन पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है, और केवल तब तक समाप्त होगा जब खेजड़ी संरक्षण और संबंधित कानून पर ठोस निर्णय लिया जाएगा।
संतों और पर्यावरण प्रेमियों का यह आंदोलन बीकानेर में खेजड़ी संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। आंदोलनकारी सरकार से मांग कर रहे हैं कि राज्य में खेजड़ी के संरक्षण के लिए प्रभावी कानून बनाया जाए। यह आंदोलन न केवल पर्यावरण की सुरक्षा के लिए है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और बिश्नोई समुदाय की मान्यताओं को बनाए रखने के लिए भी अहम है।
आंदोलन के दौरान स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी घटनास्थल पर मौजूद हैं। उन्होंने अनशन को शांतिपूर्ण तरीके से बनाए रखने के लिए पर्यावरण प्रेमियों और संतों से सहयोग की अपील की है। प्रशासन ने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सतर्कता बरती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खेजड़ी का संरक्षण केवल वनस्पति और पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि बीकानेर के पारंपरिक जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। खेजड़ी के बढ़ते विनाश को रोकने के लिए आंदोलनकारी यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि समय रहते ठोस कदम उठाना जरूरी है।
इस आंदोलन ने बीकानेर में पर्यावरण और समुदाय के मुद्दों पर लोगों की जागरूकता बढ़ाई है। स्थानीय लोग भी संतों और आंदोलनकारियों के समर्थन में जुटते दिख रहे हैं। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगें पूरी तरह से कानूनी और शांतिपूर्ण हैं, और जब तक सरकार कानून बनाने की पहल नहीं करती, अनशन जारी रहेगा।
बीकानेर के खेजड़ी संरक्षण आंदोलन ने यह संदेश दिया है कि पर्यावरण और समुदाय के हितों के लिए नागरिक सक्रियता आवश्यक है। संतों और महिलाओं के नेतृत्व में यह अनशन अब तीसरे दिन भी जारी है, और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहा है।
