नगर निगम चुनाव के बाद मेयर पद की रेस तेज, जयपुर से दिल्ली तक लॉबिंग; ब्राह्मण और राजपूत समाज ने भी ठोका दावा
नगर निगम चुनाव के परिणाम का सीन सोमवार दोपहर तक साफ होते ही भारतीय जनता पार्टी में मेयर की कुर्सी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव परिणाम आने के साथ ही भाजपा में संभावित मेयर के नाम को लेकर लॉबिंग शुरू हो गई। चुनाव से पहले जिन नामों की चर्चा चल रही थी, अब जीतकर आए पार्षदों में से दावेदार सबसे आगे माने जा रहे हैं।
मेयर पद को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग स्तर पर संपर्क साधे जाने की खबर है। जयपुर से लेकर दिल्ली तक नेताओं से मुलाकात और संपर्क का दौर शुरू हो गया है। संगठन से जुड़े नेताओं के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी अपने-अपने दावेदार के लिए समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। ऐसे में भाजपा के सामने मेयर का चयन अब केवल राजनीतिक समीकरण का नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन का मुद्दा भी बनता नजर आ रहा है।
इस बार मेयर पद की दावेदारी में सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अभी तक वैश्य समाज की ओर से मेयर पद के लिए सबसे मजबूत दावा माना जा रहा था। हालांकि अब ब्राह्मण समाज की ओर से भी लॉबिंग शुरू हो गई है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि वैश्य और जैन समाज से अब तक तीन मेयर बन चुके हैं, जबकि भाजपा ने ब्राह्मण समाज से अब तक किसी को मेयर पद नहीं दिया है।
ब्राह्मण समाज की ओर से इसी आधार पर इस बार प्रतिनिधित्व की मांग को मजबूत किया जा रहा है। समाज से जुड़े लोगों और पार्टी के भीतर मौजूद समर्थकों की ओर से संभावित दावेदारों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। वहीं राजपूत समाज की ओर से भी मेयर पद को लेकर दावेदारी सामने आने लगी है। राजपूत समाज से अब तक किसी व्यक्ति को भाजपा की ओर से मेयर बनाए जाने का दावा नहीं किया गया है।
स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में राजपूत समाज की नाराजगी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि यूजीसी से जुड़े मुद्दे को लेकर इस समाज में नाराजगी है। ऐसे में मेयर पद के चयन के दौरान पार्टी नेतृत्व सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रख सकता है।
हालांकि फिलहाल मेयर का चुनाव तत्काल होने की स्थिति में नहीं है। नगर निगम के चार वार्डों में री-पोलिंग होनी है। इसी वजह से मेयर चुनाव की प्रक्रिया फिलहाल टाल दी गई है। इन वार्डों में मतदान और उसके बाद परिणाम आने के बाद ही नगर निगम की पूरी तस्वीर साफ होगी।
री-पोलिंग के कारण भाजपा को मेयर पद के लिए रणनीति बनाने का अतिरिक्त समय भी मिल गया है। पार्टी इस दौरान संभावित दावेदारों के नामों पर मंथन कर सकती है और सामाजिक तथा राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला लेने की कोशिश करेगी।
फिलहाल भाजपा में मेयर पद को लेकर कई दावेदार सक्रिय हो गए हैं। जीतकर आए पार्षदों में से किसके नाम पर पार्टी नेतृत्व मुहर लगाता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन इतना तय है कि मेयर की कुर्सी को लेकर जयपुर से दिल्ली तक सियासी संपर्क और लॉबिंग का दौर तेज हो चुका है।
