22 साल बाद रशीदपुरा‑खोरी रेलवे स्टेशन से फिर भागेगी ट्रेन, दशकों पुराना सपना होगा पूरा
दशकों पुराना ग्रामीणों का सपना बुधवार को सच होने जा रहा है, जब रशीदपुरा‑खोरी रेलवे स्टेशन से 22 साल के अन्तराल के बाद ट्रेन का परिचालन फिर शुरू होगा। यह ऐतिहासिक पल ग्रामीणों और यात्रियों के लिए गर्व और उत्साह का विषय बन गया है, क्योंकि लंबे समय से बंद पड़े इस स्टेशन से अब पहली बार ट्रेन रवाना होने जा रही है।
रशीदपुरा‑खोरी स्टेशन का इतिहास करीब 1942 से शुरू हुआ था, लेकिन 2004 में इसे घाटे के कारण बंद कर दिया गया था। स्टेशन के बंद होने के बाद आसपास के ग्रामीणों को यातायात की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यात्रियों की संख्या गिरने के साथ ही स्टेशन की उपयोगिता भी कम होती चली गई, जिससे यह कई वर्षों तक रेल नेटवर्क से कट गया रहा।
ग्रामीणों ने स्टेशन को बंद हालत में भी चल रहे रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए अनूठी पहल की थी। साल 2009 में स्थानीय लोगों की मांग और समर्पण को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने स्टेशन को अस्थायी रूप से पुनः खोलने का निर्णय लिया, लेकिन इसके लिए ग्रामीणों को स्वयं कुछ शर्तें पूरी करनी थीं। इनमें स्टेशन का संचालन सुनिश्चित करने के लिए मासिक 40 हजार रुपए की आय उत्पन्न करने की बात शामिल थी।
स्थानीय ग्रामीणों ने इसके लिए जन‑चेतना अभियान चलाया और अपने संसाधनों से चंदा इकट्ठा किया। गांव‑गांव में पोस्टर लगाए गए, लोगों को ट्रेन से यात्रा करने के लिए प्रेरित किया गया और स्टेशन पर आवश्यक सुविधाओं का खुद ही ध्यान रखा गया। इस समर्पण और प्रयास के कारण स्टेशन का संचालन कई वर्षों तक स्थानीय स्तर पर सफलतापूर्वक चलता रहा और सभी के लिए एक मिसाल बन गया।
2015 में रेलवे विभाग ने इस सफल पहल को देखते हुए स्टेशन को अपग्रेड करने का निर्णय लिया और लगभग 20 करोड़ रुपए की लागत से इसे हाई‑टेक क्रॉसिंग स्टेशन में बदल दिया गया। इसके बाद से यह स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस होकर फिर से यात्रियों के उपयोग के लिए तैयार हो गया।
अब होली के अवसर पर इस स्टेशन से विशेष ट्रेन का परिचालन शुरू होगा। कोटा‑रशीदपुरा‑खोरी होली स्पेशल (09803) ट्रेन 25 फरवरी को कोटा से रवाना होकर सुबह 5:20 बजे स्टेशन पर पहुँचेगी। इसके बाद 26 फरवरी को सुबह 6:55 बजे यह ट्रेन वापस कोटा के लिए हलचल भरे सफर पर निकल जाएगी। इसी पैटर्न पर 4 और 5 मार्च को भी इसी स्पेशल ट्रेन का परिचालन तय है।
स्थानीय किसानों और यात्रियों के लिए यह कदम बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। रशीदपुरा और खोरी इलाकों में संबद्ध किसान प्याज की व्यापारिक गतिविधियों के लिए रेल सुविधा की कमी को एक बड़ी समस्या मानते थे। अब नियमित ट्रेन ठहराव से व्यापार और दैनिक आवागमन दोनों में सुधार आएगा। वहीं, आसपास के गाँवों के ग्रामीणों को सुविधा मिलने के साथ ही अन्य शहरों से बेहतर संपर्क स्थापित करने में मदद मिलेगी।
स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन और अपने संघर्ष समिति के सदस्यों के प्रयासों को सराहा है। उनका मानना है कि यह केवल एक ट्रेन हल चल नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, एकता और दृढ़ इच्छाशक्ति की जीत है। 22 साल बाद यह स्टेशन फिर से पटरी पर दौड़ेगा और इस क्षेत्र के लोगों के जीवन और ग्रामीण परिवहन के परिदृश्य में नई ऊर्जा जोड़ देगा।
