एडवोकेट ने महिला को नशीला प्रसाद खिलाकर बनाया न्यूड वीडियो, एक्सक्लुसीव फुटेज में जानें रेप किया फिर ब्लैकमेल कर हड़पे गहने और कैश
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में एक एडवोकेट द्वारा महिला के साथ रेप और ब्लैकमेलिंग के गंभीर मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सेशन न्यायाधीश ने आरोपी एडवोकेट को 7 साल के कठोर कारावास और 51 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला कोर्ट परिसर से शुरू हुई जान-पहचान और उसके बाद हुए शोषण से जुड़ा हुआ है, जिसने न्यायिक व्यवस्था और भरोसे को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
कोर्ट में मुलाकात से शुरू हुई वारदात की कहानी
मामले के अनुसार, पीड़िता का पिछले लगभग दो वर्षों से कोर्ट में एक केस चल रहा था। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक एडवोकेट से हुई, जिसने उसे कानूनी मदद और केस में सहयोग का भरोसा दिया। धीरे-धीरे आरोपी ने उसका विश्वास जीत लिया और खुद को मददगार व भरोसेमंद व्यक्ति के रूप में पेश किया। आरोप है कि आरोपी ने बाद में महिला को शादी का झांसा देकर अपने जाल में फंसा लिया और उसका शारीरिक शोषण किया।
बेहोश कर की गई हैवानियत का आरोप
प्रकरण में सामने आए तथ्यों के अनुसार, वर्ष 2016 में आरोपी महिला के घर पहुंचा और उसे मंदिर का ‘प्रसाद’ खिलाया। आरोप है कि प्रसाद खाने के बाद महिला बेहोश हो गई। इसी स्थिति का फायदा उठाकर आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और उसकी आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड कर ली।
ब्लैकमेल कर वसूले लाखों रुपये और गहने
इसके बाद आरोपी ने कथित रूप से वीडियो के आधार पर महिला को ब्लैकमेल करना शुरू किया। डर और धमकी का इस्तेमाल करते हुए उसने महिला से लाखों रुपये नकद और गहने भी ऐंठ लिए। पीड़िता लंबे समय तक मानसिक दबाव और भय में रही।
अदालत ने सुनाया कड़ा फैसला
सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अतिरिक्त सेशन न्यायाधीश ने आरोपी एडवोकेट को दोषी करार देते हुए 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 51 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
न्याय व्यवस्था में विश्वास और चेतावनी
यह मामला न केवल एक गंभीर आपराधिक घटना को उजागर करता है, बल्कि पेशेवर जिम्मेदारी और विश्वास के दुरुपयोग का भी उदाहरण है। कोर्ट परिसर से जुड़े व्यक्ति द्वारा ही इस तरह के अपराध को अंजाम दिए जाने से यह मामला और भी संवेदनशील बन गया है।
