निकाय और पंचायत चुनाव से पहले प्रशासनिक फेरबदल, फुटेज में जानें फील्ड पोस्टिंग अधिकारियों के ट्रांसफर पर लगी रोक
आगामी निकाय और पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोग ने राज्य में तैनात फील्ड पोस्टिंग वाले अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो अधिकारी अपने गृह क्षेत्र में पदस्थापित हैं, उन्हें 28 फरवरी तक अनिवार्य रूप से पद से हटाया जाए।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी आदेशों के अनुसार, यह निर्देश निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही प्रभावी हो जाएंगे और चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक लागू रहेंगे। आयोग का मानना है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात या गृह क्षेत्र में पदस्थ अधिकारियों की मौजूदगी से चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है, इसलिए यह कदम उठाया गया है।
आयोग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जो अधिकारी किसी एक स्थान पर तीन साल या उससे अधिक समय से पदस्थापित हैं, उनका स्थानांतरण किया जाना अनिवार्य होगा। इस आदेश के दायरे में जिला कलेक्टर, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम), उपखंड अधिकारी (एसडीएम) के साथ-साथ नगर निकायों में तैनात अधिकारी, थानाधिकारी और अन्य फील्ड स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। यानी प्रशासनिक और पुलिस महकमे के बड़े हिस्से में बदलाव देखने को मिल सकता है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने जिलों में ऐसे अधिकारियों की सूची तैयार करें, जो गृह जिले में पदस्थ हैं या निर्धारित समयावधि से अधिक समय से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। तय समयसीमा के भीतर इन अधिकारियों को हटाकर नई नियुक्तियां की जाएंगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना उसकी अनुमति के कोई भी स्थानांतरण आदेश जारी नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस फैसले के बाद राज्यभर में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। कई जिलों में ऐसे अधिकारी हैं जो लंबे समय से एक ही पद पर जमे हुए हैं। अब उन्हें चुनाव से पहले हटाया जाएगा ताकि किसी भी तरह के राजनीतिक या स्थानीय दबाव से मुक्त रहकर चुनावी प्रक्रिया संपन्न कराई जा सके।
निर्वाचन आयोग का यह कदम पूर्व में हुए चुनावों के अनुभवों के आधार पर उठाया गया है। आयोग का मानना है कि फील्ड स्तर के अधिकारियों की निष्पक्ष भूमिका चुनाव की सफलता की कुंजी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने सख्त रुख अपनाया है।
इस फैसले से जहां प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है, वहीं राजनीतिक दल भी आयोग के आदेशों पर नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही चुनावी सरगर्मियां और तेज हो जाएंगी। राज्य निर्वाचन आयोग के इस फैसले को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
