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6 साल से अधिक समय तक बिना सजा जेल में बंद आरोपी को मिली जमानत, वीडियो मे देखें राजस्थान हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

6 साल से अधिक समय तक बिना सजा जेल में बंद आरोपी को मिली जमानत, वीडियो मे देखें राजस्थान हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
 
6 साल से अधिक समय तक बिना सजा जेल में बंद आरोपी को मिली जमानत, वीडियो मे देखें राजस्थान हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक आरोपी को बिना सजा के छह साल से अधिक समय तक जेल में रखे जाने पर गहरी नाराजगी और हैरानी जताई है। अदालत ने इसे संविधान द्वारा प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का घोर उल्लंघन करार दिया है। कोर्ट ने संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी के तत्कालीन चेयरमैन शैतान सिंह को जमानत देते हुए यह सख्त टिप्पणी की।

जस्टिस अनिल कुमार उपमन की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी व्यक्ति को लंबे समय तक बिना दोष सिद्ध हुए जेल में रखना न्याय की मूल भावना के विपरीत है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब न्यायिक प्रक्रिया स्वयं दंडात्मक स्वरूप ले लेती है, तो यह कानून के शासन के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।

सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव सुराणा ने जोरदार पैरवी की। उन्होंने अदालत को बताया कि शैतान सिंह के खिलाफ जिन धाराओं में चार्जशीट पेश की गई है, उनमें अधिकतम सात साल की सजा का ही प्रावधान है। इसके बावजूद आरोपी पिछले छह साल चार महीने से न्यायिक हिरासत में बंद है।

बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि इतनी लंबी अवधि तक विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहना अपने आप में सजा के समान है। उन्होंने कहा कि मामले की सुनवाई अभी पूरी नहीं हुई है और ट्रायल में देरी के चलते आरोपी का मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहा है। ऐसे में उसे जमानत देना न्यायोचित होगा।

अदालत ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि किसी भी आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। न्यायालय ने माना कि ट्रायल में हो रही देरी के कारण आरोपी की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त अधिकारों के खिलाफ है।

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि न्यायिक प्रणाली का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना है। यदि सुनवाई लंबी खिंचती है और आरोपी सालों तक जेल में रहता है, तो यह व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने शैतान सिंह को जमानत प्रदान कर दी। अदालत के इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था में व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है, जहां आरोपी लंबे समय से ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं।