उदयपुर में सामाजिक मर्यादा का अनोखा मामला, वीडियो में जानें क्यों पिता ने जिंदा बेटी का छपवाया शोक संदेश, कराया मृत्युभोज
राजस्थान के उदयपुर जिले से एक चौंकाने वाला और भावनात्मक मामला सामने आया है, जहां एक पिता ने अपनी जिंदा बेटी को सामाजिक रूप से मृत मानते हुए उसका शोक संदेश छपवाया और मृत्युभोज तक कर दिया। यह मामला उदयपुर जिले के ओगणा इलाके का बताया जा रहा है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे पारिवारिक पीड़ा और सामाजिक परंपराओं से जोड़कर देख रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, करीब 10 साल पहले युवती की शादी सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ हुई थी। शुरुआती वर्षों में सब कुछ सामान्य और अच्छा चलता रहा। शादी के बाद महिला के तीन बच्चे भी हुए। परिवार खुशहाल था और किसी को अंदेशा नहीं था कि आगे चलकर ऐसा फैसला सामने आएगा। लेकिन कुछ समय बाद महिला अपने तीन बच्चों को छोड़कर घर से चली गई और दूसरे युवक से शादी कर ली।
जब इस बात की जानकारी महिला के माता-पिता को लगी तो वे बेहद आहत हो गए। पिता ने बेटी को समझाने की भरसक कोशिश की। परिवार और समाज के लोगों ने भी उसे बच्चों के भविष्य और परिवार की जिम्मेदारी का हवाला देकर वापस लौटने के लिए मनाया, लेकिन बेटी अपनी जिद पर अड़ी रही और पहले परिवार में लौटने से साफ इनकार कर दिया।
बेटी के इस फैसले से आहत होकर पिता ने कठोर लेकिन भावनात्मक कदम उठाया। उन्होंने समाज के सामने यह संदेश देने के लिए कि उनकी बेटी अब उनके लिए नहीं रही, जिंदा बेटी की शोक पत्रिका छपवा दी। शोक पत्रिका में बेटी को मृत बताया गया और पारंपरिक रूप से शोक संदेश वितरित किए गए। यही नहीं, परिवार की ओर से मृत्युभोज का आयोजन भी किया गया।
बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह परिवार ने मुंडन (कातरिया) की रस्म भी निभाई, जो आमतौर पर मृत्यु के बाद की जाने वाली परंपरा मानी जाती है। इसके बाद विधिवत मृत्युभोज कराया गया, जिसमें समाज के लोग भी शामिल हुए। इस पूरे घटनाक्रम ने गांव और आसपास के इलाकों में सनसनी फैला दी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कदम पिता के लिए आसान नहीं था। बेटी की हरकत से वह मानसिक और सामाजिक रूप से टूट चुके थे। उन्होंने समाज को यह संदेश देने के लिए यह फैसला लिया कि बेटी ने अपने बच्चों और परिवार को छोड़कर जो रास्ता चुना, वह उन्हें स्वीकार नहीं है। वहीं कुछ लोग इस घटना को सामाजिक दबाव और परंपराओं का नतीजा भी मान रहे हैं।
इस मामले ने एक बार फिर पारिवारिक रिश्तों, सामाजिक मान्यताओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच टकराव को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर पिता का दर्द और सामाजिक अपमान सामने आता है, वहीं दूसरी ओर महिला का व्यक्तिगत निर्णय भी बहस का विषय बन गया है। फिलहाल यह मामला पुलिस या प्रशासनिक कार्रवाई से दूर है, लेकिन सामाजिक स्तर पर इस घटना को लेकर गहन चर्चा जारी है।
