सीकर में 8 साल से अटका बड़ा सड़क प्रोजेक्ट फिर ट्रैक पर, वन विभाग ने भेजा भूमि विचलन प्रस्ताव
राजस्थान के सीकर जिले में रीको औद्योगिक क्षेत्र को बीकानेर बाईपास से जोड़ने वाली सड़क परियोजना को लेकर हाल ही में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। यह प्रोजेक्ट पिछले आठ वर्षों से वन विभाग की भूमि से संबंधित अड़चन के कारण अटका हुआ था, लेकिन अब उसे आगे बढ़ाने की राह साफ होती दिख रही है। जिला वन विभाग ने संबंधित प्रस्ताव को शासन स्तर पर भेज दिया है, जिससे सड़क निर्माण जल्द ही शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
यह सड़क परियोजना सीकर के रीको औद्योगिक क्षेत्र को बीकानेर बाईपास से सीधे जोड़ने के लिए है, जिससे औद्योगिक एवं व्यावसायिक क्षेत्र का संपर्क मजबूत हो सके तथा यातायात संबंधी समस्याओं को आसान बनाया जा सके। यह रोड मास्टर प्लान 2031 का हिस्सा है और करीब 1.3 किलोमीटर लंबी तथा 30 मीटर चौड़ी होगी।
8 साल से अटका प्रोजेक्ट: वन भूमि बनी बाधा
इस परियोजना का मुख्य कारण वन विभाग की 1.35 हेक्टेयर भूमि का डायवर्जन (भूमि विचलन) रहा है। लंबे समय से यह अड़चन सड़क निर्माण को रोक रही थी। भूमि के डायवर्जन के बिना अनुमति प्राप्त करना संभव नहीं था, जिसके चलते प्राथमिक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया था। लेकिन अब जिला वन विभाग ने पिछली आपत्तियों को दूर करते हुए एक संशोधित प्रस्ताव फिर से एफसीए (वन भूमि विचलन) के लिए नोडल अधिकारी को भेजा है। इस प्रस्ताव में जनहित का हवाला देकर वन भूमि के डायवर्जन की अनुशंसा की गई है, जिसे नोडल अधिकारी ने राज्य वन एवं पर्यावरण विभाग के सचिव तक भेज दिया है। इसके बाद फाइल केंद्र सरकार के पास भेजी जाएगी। अनुमति मिलने के बाद सड़क का निर्माण शुरू हो सकेगा।
पत्रिका की पहल से मिली मान्यता
इस लंबित सड़क योजना को लेकर पहले भी कई बार मीडिया और स्थानीय संगठनों ने आवाज उठाई थी। राजस्थान पत्रिका में इस मुद्दे को प्रमुख रूप से प्रकाशित किए जाने के बाद औद्योगिक क्षेत्र उद्यमी संघ और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी इस दिशा में सक्रिय कदम उठाए। उद्यमी संघ के अध्यक्ष कमल किशोर डोलिया सहित कई लोगों ने जनहित में ज्ञापन देकर अधिकारियों व प्रतिनिधियों से समस्या का समाधान करने की मांग की थी। इस प्रयास का असर दिखा है और प्रस्ताव को फिर से आगे बढ़ाया गया है।
वन भूमि का वैकल्पिक प्रबंधन भी होगा
इस परियोजना के लिए वन विभाग की भूमि का डायवर्जन आवश्यक है, लेकिन नियम के अनुसार उतनी ही भूमि का फॉरेस्टेशन (पुनर्वनरोपण) भी किया जाना आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सीकर के झिराना गांव में वन विभाग को वैकल्पिक भूमि सौंप दी है। यदि केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलती है तो इस भूमि पर वृक्षारोपण किया जाएगा और इसे वन भूमि के रूप में विकसित किया जाएगा।
प्रोजेक्ट से मिलेंगे कई फायदे
विशेषज्ञों और प्रशासन का मानना है कि यह सड़क बनने के बाद सीकर में यातायात की समस्या काफी हद तक कम होगी। वर्तमान में हजारों वाहन बाजार मार्ग से गुजरते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है, खासकर बस डिपो, बजरंग कांटा और राणी सती इलाके में। नई सड़क बनने से इस मार्ग पर आने‑जाने वाले किसानों, व्यापारियों और आम यात्रियों का समय और ईंधन दोनों बचेंगे।
आगे की कार्रवाई पर नजर
अब प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा और यदि उससे वन भूमि डायवर्जन की मंजूरी मिल जाती है तो परियोजना निर्माण के लिए सरकारी एजेंसियों को काम शुरू करने की हरी झंडी मिलेगी। प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने की आशा कर रहे हैं, जिससे जल्द ही यह सड़क बनकर तैयार हो सके और शहर की यातायात समस्याओं का स्थाई समाधान मिल सके।
