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सरकार की बड़ी सौगात! किसान-पशुपालकों को मिलेंगे 5 लाख रुपये, यहां जानिए कैसे उठाए योजना का लाभ

 
सरकार की बड़ी सौगात! किसान-पशुपालकों को मिलेंगे 5 लाख रुपये, यहां जानिए कैसे उठाए योजना का लाभ 

देश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने और देशी नस्लों के संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार हर साल गोपाल रत्न पुरस्कार देती है। इस पुरस्कार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर निर्धारित की गई है। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि यह पुरस्कार राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत तीन श्रेणियों में दिया जाता है। इसमें देशी गाय और भैंस पालने वाले किसान, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन और सहकारी एवं दुग्ध उत्पादक कंपनियां शामिल हैं।

कौन से किसान आवेदन कर सकते हैं
पुरस्कार का उद्देश्य देशी डेयरी नस्लों की उत्पादकता बढ़ाना, तकनीशियनों को 100 प्रतिशत कृत्रिम गर्भाधान कवरेज के लिए प्रेरित करना और दुग्ध उत्पादक कंपनियों में प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ावा देना है। पात्रता शर्तों के अनुसार, केवल वही किसान आवेदन कर सकेंगे जो 53 प्रमाणित देशी गायों की नस्लों या 20 प्रमाणित भैंसों की नस्लों में से किसी एक का पालन करते हों।

तकनीशियन के लिए आवश्यक पात्रता
इसके अलावा, केवल वही तकनीशियन पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकेंगे जिन्होंने कम से कम 90 दिनों का प्रशिक्षण लिया हो। ग्राम स्तर पर सहकारी समितियाँ, एमपीसी और एफपीओ आवेदन कर सकते हैं, जिनका दूध उत्पादन प्रतिदिन 100 लीटर से अधिक हो और जिनसे कम से कम 50 किसान सदस्य जुड़े हों।

पुरस्कार राशि कितनी होगी

प्रथम पुरस्कार के रूप में पाँच लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार के रूप में तीन लाख रुपये और तृतीय पुरस्कार के रूप में दो लाख रुपये दिए जाएँगे। विजेताओं को यह पुरस्कार 26 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में प्रदान किया जाएगा। आपको बता दें कि मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन और डेयरी विभाग ने स्वदेशी गोजातीय नस्लों के संरक्षण और विकास के उद्देश्य से दिसंबर 2014 में राष्ट्रीय गोजातीय प्रजनन और डेयरी विकास कार्यक्रम के अंतर्गत "राष्ट्रीय गोकुल मिशन" की शुरुआत की थी।