पाली में 12 फीट के अजगर ने निगला 15 किलो का सियार, तारबंदी में फंसने के बाद हुआ रेस्क्यू; वीडियो में देंखे बाहर निकाला शिकार
राजस्थान के पाली जिले में कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य से सटे इलाके में वन्यजीवों से जुड़ा एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां करीब 12 फीट लंबे अजगर ने एक करीब 15 किलो वजनी सियार को निगल लिया। शिकार करने के बाद जब अजगर जंगल की ओर लौट रहा था, तभी वह खेत की तारबंदी में फंस गया। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद उसका सुरक्षित रेस्क्यू किया।
तारबंदी में फंस गया अजगर
घटना शनिवार शाम करीब 5 बजे की बताई जा रही है। यह मामला राजपुरा ठलड़ा बस्ती का है, जो कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य से सटा हुआ क्षेत्र है। ग्रामीणों ने खेत की तारबंदी में फंसे विशाल अजगर को देखा तो तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी।मौके पर पहुंचे वनकर्मियों ने देखा कि अजगर तारों में बुरी तरह उलझा हुआ था और बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था। टीम ने सावधानी बरतते हुए तारों को काटकर उसे सुरक्षित बाहर निकाला।
रेस्क्यू के बाद उगल दिया सियार
वन विभाग के अनुसार, रेस्क्यू के कुछ ही देर बाद अजगर ने अपने पेट से निगले हुए शिकार को बाहर निकालना शुरू कर दिया। करीब 10 मिनट की प्रक्रिया के बाद उसने पूरा सियार बाहर उगल दिया। हालांकि, तब तक सियार की मौत हो चुकी थी।वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, बड़े शिकार के बाद तनाव या खतरा महसूस होने पर अजगर कई बार अपने निगले हुए शिकार को बाहर निकाल देता है, ताकि वह हल्का होकर तेजी से सुरक्षित स्थान की ओर जा सके।
ग्रामीणों ने बनाया वीडियो
इस पूरी घटना को आसपास मौजूद ग्रामीणों ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। विशाल अजगर और उसके रेस्क्यू का वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
जांच के बाद प्राकृतिक आवास में छोड़ा
रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीम ने अजगर का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। निरीक्षण में वह स्वस्थ पाया गया, जिसके बाद उसे राजपुरा बांध के जलीय क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया गया। पानी में पहुंचते ही अजगर तेजी से गहराई की ओर बढ़ गया।
वन विभाग की अपील
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी आबादी वाले क्षेत्र में अजगर या अन्य वन्यजीव दिखाई दें तो उन्हें पकड़ने या परेशान करने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि वन्यजीव और लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
