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नागौर में 9 वर्षीय छात्रा दिव्या की हार्ट अटैक से मौत, स्कूल में मच गया हड़कंप

नागौर में 9 वर्षीय छात्रा दिव्या की हार्ट अटैक से मौत, स्कूल में मच गया हड़कंप
 
नागौर में 9 वर्षीय छात्रा दिव्या की हार्ट अटैक से मौत, स्कूल में मच गया हड़कंप

राजस्थान के नागौर जिले के गोटन कस्बे से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मंगलवार, 26 फरवरी की सुबह 9 साल की छात्रा दिव्या की अचानक हार्ट अटैक (कार्डियक अरेस्ट) से मौत हो गई। यह हादसा तब हुआ जब सभी बच्चे स्कूल के मैदान में प्रार्थना के लिए इकट्ठा थे।

जानकारी के अनुसार, दिव्या तालनपुर (फड़ौदा की ढाणी) निवासी राजेंद्र बापेडिया की बेटी थी और वह स्कूल की 5वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थी। मंगलवार सुबह, दिव्या रोज की तरह करीब 7 बजे स्कूल पहुंची थी। जैसे ही प्रार्थना का समय शुरू हुआ, दिव्या अचानक बेहोश होकर गिर गई।

स्कूल स्टाफ और अन्य छात्रों ने तुरंत दिव्या को निकटतम चिकित्सालय पहुँचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक तौर पर चिकित्सकों ने हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) को मौत का संभावित कारण बताया।

दिव्या की अचानक मौत से स्कूल और स्थानीय समुदाय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों में गहरी चिंता और शोक की लहर दौड़ गई। स्कूल प्रशासन ने तुरंत दिव्या के माता-पिता को घटना की जानकारी दी।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में अचानक हार्ट अटैक होना दुर्लभ है, लेकिन कभी-कभी हृदय संबंधी कोई अनदेखी समस्या या अन्य स्वास्थ्य कारण इसकी वजह बन सकते हैं। चिकित्सालय ने बताया कि इस तरह की घटनाओं में तुरंत प्राथमिक चिकित्सा और समय पर रेस्क्यू बहुत अहम होता है, लेकिन दुर्भाग्यवश इस बार मदद समय पर कारगर नहीं हो सकी।

दिव्या की मौत ने अभिभावकों और शिक्षकों को सावधानी और स्वास्थ्य जांच की अहमियत याद दिलाई है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि स्कूलों में बच्चों के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, इमरजेंसी मेडिकल सुविधा और फर्स्ट एड ट्रेनिंग को अनिवार्य किया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों और स्कूल के छात्रों ने दिव्या के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। समाज में यह घटना बच्चों के स्वास्थ्य और स्कूल सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत को भी उजागर करती है।

इस दुखद घटना ने यह संदेश दिया है कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर निगरानी और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण बेहद जरूरी हैं। दिव्या की असामयिक मौत ने परिवार, स्कूल और स्थानीय समुदाय को गहरे शोक में डुबो दिया है।

अंततः नागौर जिले की यह घटना सभी के लिए एक चेतावनी और संदेश है कि बच्चों की देखभाल, स्वास्थ्य जांच और आपातकालीन तैयारी को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।