उदयपुर के 90 मासूम सूरत की फैक्ट्रियों से रेस्क्यू, फुटेज में जानें बच्चों से करवाई जा रही थी मजदूरी, मिलते थे सिर्फ 5 हजार महीना
राजस्थान के उदयपुर जिले से मानव तस्करी और बाल मजदूरी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उदयपुर के आदिवासी इलाकों के करीब 90 बच्चों को गुजरात के सूरत शहर की फैक्ट्रियों से रेस्क्यू किया गया है, जहां उनसे कथित रूप से मजदूरी करवाई जा रही थी। बुधवार को Rajasthan State Commission for Protection of Child Rights और उदयपुर की मानव तस्करी निरोधी यूनिट ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इन बच्चों को मुक्त कराया। रेस्क्यू किए गए बच्चों की उम्र 7 से 14 साल के बीच बताई जा रही है।
जांच में सामने आया कि ये बच्चे सूरत के टेक्सटाइल मार्केट से जुड़ी छोटी फैक्ट्रियों और यूनिट्स में काम कर रहे थे। कुछ बच्चों से साड़ियों में धागे का काम करवाया जा रहा था, जबकि कई बच्चे मशीनें चलाने जैसे जोखिम भरे काम में लगाए गए थे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मासूम बच्चों को पूरे महीने की मजदूरी के बदले केवल 5 हजार से 8 हजार रुपये तक दिए जा रहे थे। अधिकारियों के अनुसार इनमें से कई बच्चे कुछ महीने पहले ही काम के लिए सूरत लाए गए थे।
रेस्क्यू टीम ने सूरत के पूना थाना इलाके में सीताराम सोसाइटी, मुक्तिधाम सोसाइटी समेत करीब छह स्थानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कई बच्चे तंग कमरों और फैक्ट्री जैसी जगहों में काम करते मिले। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि ज्यादातर बच्चे स्कूल छोड़ चुके थे और आर्थिक मजबूरी के कारण मजदूरी करने भेजे गए थे। अधिकारियों को मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क की आशंका भी है, जिसकी अब गहराई से जांच की जा रही है।
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इतनी कम उम्र के बच्चों से फैक्ट्रियों में काम करवाना न केवल कानूनन अपराध है बल्कि उनके भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। फिलहाल सभी बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है और उन्हें वापस उनके परिवारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन अब इस पूरे मामले में शामिल लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की तैयारी में जुटा है। यह मामला एक बार फिर बाल मजदूरी, मानव तस्करी और आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौतियों को उजागर कर रहा है।
