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जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में ‘सेहत का प्रसाद’, 42 साल पुरानी परंपरा फिर हुई जीवंत

जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में ‘सेहत का प्रसाद’, 42 साल पुरानी परंपरा फिर हुई जीवंत
 
जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में ‘सेहत का प्रसाद’, 42 साल पुरानी परंपरा फिर हुई जीवंत

राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर में स्थित प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर एक बार फिर अपनी अनूठी धार्मिक परंपरा को लेकर चर्चा में है। यहां आस्था के साथ-साथ ‘सेहत का आशीर्वाद’ भी श्रद्धालुओं को प्राप्त हो रहा है। शनिवार को पावन पुष्य नक्षत्र के विशेष संयोग पर मंदिर में 42 साल पुरानी एक अद्भुत परंपरा को पुनर्जीवित किया गया, जिसने भक्तों के बीच खास उत्साह पैदा कर दिया।

मंदिर में भगवान श्री गणेश, जिन्हें भगवान गजानन के रूप में पूजा जाता है, को इस दिन विशेष रूप से च्यवनप्राश का भोग लगाया गया। इसके बाद इस च्यवनप्राश को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। आमतौर पर मंदिरों में मिठाई या पंचामृत का प्रसाद दिया जाता है, लेकिन यहां स्वास्थ्यवर्धक च्यवनप्राश का प्रसाद मिलने से यह परंपरा विशेष बन जाती है।

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, यह परंपरा करीब चार दशक पहले शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करना था। च्यवनप्राश आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण औषधि मानी जाती है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होती है। इसी सोच के साथ इसे भगवान को अर्पित कर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है, ताकि भक्तों को ‘सेहत का आशीर्वाद’ भी मिल सके।

शनिवार सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। लोग लंबी कतारों में खड़े होकर भगवान गणेश के दर्शन करने के साथ इस विशेष प्रसाद को प्राप्त करने के लिए उत्साहित नजर आए। मंदिर में भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार के बीच एक दिव्य और सकारात्मक वातावरण बना रहा, जिसने पूरे आयोजन को और भी विशेष बना दिया।

श्रद्धालुओं का मानना है कि पुष्य नक्षत्र में किया गया कोई भी धार्मिक कार्य विशेष फलदायी होता है। ऐसे में इस दिन च्यवनप्राश का भोग लगाकर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करना न केवल आध्यात्मिक बल्कि शारीरिक रूप से भी लाभकारी माना जा रहा है। कई भक्तों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे परंपरा और स्वास्थ्य का सुंदर संगम बताया।

मंदिर प्रशासन ने बताया कि इस परंपरा को आगे भी नियमित रूप से जारी रखने का प्रयास किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी भी इस अनूठी परंपरा से जुड़ सके। साथ ही, उन्होंने श्रद्धालुओं से व्यवस्था बनाए रखने और सहयोग करने की अपील भी की।

गौरतलब है कि मोती डूंगरी गणेश मंदिर जयपुर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इस तरह की विशेष परंपराएं न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती हैं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश भी देती हैं