फर्जी खेल सर्टिफिकेट से सरकारी नौकरी पाने वाले PTI समेत 4 ने किया सरेंडर, ग्रेड थर्ड शिक्षक भर्ती में हुआ था बड़ा फर्जीवाड़ा
राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2022 में फर्जी खेल प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस प्रकरण में अब PTI समेत चार आरोपियों के सरेंडर करने की खबर सामने आई है। इससे पहले मामले में 20 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच का केंद्र खेल कोटे के तहत ताइक्वांडो के कथित फर्जी प्रमाण पत्र और उनकी सत्यापन रिपोर्ट तैयार करने का मामला है।
खेल कोटे से नौकरी पाने के लिए लगाया फर्जी प्रमाण पत्र
मामला राजस्थान में तृतीय श्रेणी अध्यापक सीधी भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थियों ने उत्कृष्ट खिलाड़ी कोटे के तहत चयन पाने के लिए ताइक्वांडो के कथित फर्जी खेल प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया। इन दस्तावेजों के सत्यापन के लिए फर्जी ई-मेल के जरिए रिपोर्ट भेजे जाने का आरोप भी सामने आया है।
राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने मार्च 2026 में कार्रवाई करते हुए 19 अभ्यर्थियों समेत 20 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद मामले में अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की गई।
फर्जी ई-मेल से खुला मामले का राज
जांच के दौरान एक संदिग्ध ई-मेल का स्क्रीनशॉट मिलने के बाद पुलिस को फर्जीवाड़े का सुराग मिला। इस ई-मेल में ताइक्वांडो फेडरेशन के नाम पर अभ्यर्थियों के खेल प्रमाण पत्रों के सत्यापन की जानकारी दी गई थी।
पुलिस के अनुसार, ई-मेल आईडी की स्पेलिंग में गलती मिलने पर संदेह हुआ। इसके बाद तकनीकी जांच में कथित तौर पर सामने आया कि फेडरेशन की असली ई-मेल आईडी से मिलती-जुलती एक फर्जी आईडी बनाकर सत्यापन रिपोर्ट भेजी गई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस तरीके का इस्तेमाल दस्तावेजों को सही दिखाने के लिए किया गया।
दलालों और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच
इस मामले में प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने वाले कथित दलालों और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पहले की कार्रवाई में एक सरकारी स्कूल में तैनात PTI को भी कथित तौर पर फर्जी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने अभ्यर्थियों और बिचौलियों के बीच पैसों के लेन-देन की भी जांच की है।
नौकरी और भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
खेल कोटे के प्रमाण पत्रों के कथित फर्जीवाड़े ने भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन और निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मामले में पुलिस की जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई हो सकती है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद होगा।
