बारिश में खराब हुआ 2089 टन अनाज, राजस्थान देश में सबसे आगे; वीडियो में जाने लोकसभा में FCI के आंकड़ों से बड़ा खुलासा
राजस्थान में इस साल भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों में रखा 2089 टन खाद्यान्न बारिश और प्राकृतिक आपदाओं के कारण खराब हो गया। इसके साथ ही राज्य देश में सबसे अधिक अनाज खराब होने वाला राज्य बन गया है। यह जानकारी लोकसभा में सांसद हनुमान बेनीवाल और चंद्रशेखर आजाद द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में सामने आई। केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री **निमुबेन जयंतीभाई बांभणियां> ने संसद में बताया कि एफसीआई के गोदामों में खराब या अपर्याप्त भंडारण व्यवस्था के कारण गेहूं और चावल को नुकसान नहीं हुआ है। उनके अनुसार, चक्रवात, अचानक आई बाढ़ और भारी बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाओं के चलते खाद्यान्न खराब हुआ।
पांच साल में सबसे ज्यादा नुकसान
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में पिछले पांच वर्षों के मुकाबले इस बार सबसे अधिक अनाज खराब हुआ है। राज्य में वर्ष 2025-26 के दौरान 2089 टन अनाज बारिश की वजह से खराब हुआ, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा महज 1 टन था।
पिछले वर्षों के आंकड़े इस प्रकार हैं:
- 2025-26: 2089 टन
- 2024-25: 1 टन
- 2023-24: 6 टन
- 2022-23: 136 टन
- 2021-22: 63 टन
इन आंकड़ों से साफ है कि इस वर्ष प्राकृतिक आपदाओं के कारण नुकसान में असाधारण बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पिछले वर्षों में दूसरे राज्यों में हुआ था ज्यादा नुकसान
एफसीआई के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले वर्षों में अन्य राज्यों में भी बड़ी मात्रा में अनाज खराब हुआ था।
- 2023-24 में हरियाणा में 2511 टन और पंजाब में 7746 टन अनाज खराब हुआ था।
- 2024-25 में उत्तर प्रदेश में 2254 टन और तमिलनाडु में 3001 टन अनाज खराब होने की सूचना दर्ज की गई थी।
हालांकि, इस वर्ष राजस्थान सबसे अधिक प्रभावित राज्य बनकर सामने आया है।
सरकार ने भंडारण व्यवस्था का किया बचाव
केंद्रीय राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि एफसीआई के गोदामों में रखरखाव या भंडारण व्यवस्था की कमी के कारण अनाज खराब होने का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि नुकसान का मुख्य कारण अत्यधिक बारिश, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाएं हैं, जिन पर मानव नियंत्रण संभव नहीं होता।
खाद्य सुरक्षा पर उठे सवाल
राजस्थान में बड़ी मात्रा में अनाज खराब होने के बाद खाद्य सुरक्षा और भंडारण प्रबंधन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम और अत्यधिक वर्षा जैसी परिस्थितियों को देखते हुए खाद्यान्न भंडारण के लिए अधिक सुरक्षित और आधुनिक व्यवस्थाओं की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह के नुकसान को कम किया जा सके। संसद में सामने आए इन आंकड़ों ने प्राकृतिक आपदाओं के बीच खाद्यान्न संरक्षण की चुनौती को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
