रणथम्भौर में 2 बाघिन भिड़ीं, वीडियो में देखें मां रिद्धि और बेटी माही ने एक दूसरे पर किया हमला
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में 17 मार्च को मां-बेटी बाघिनों के बीच जोरदार भिड़ंत देखने को मिली। यह दृश्य करीब डेढ़ मिनट तक चला, जिसमें मां बाघिन रिद्धि (टी-124) और उसकी बेटी माही (आरबीटी-2504) अपने इलाके के लिए आमने-सामने हुईं। अंततः बेटी को मां के सामने सरेंडर करना पड़ा।
सफारी पर आए टूरिस्ट ने इस पूरी भिड़ंत को अपने कैमरे में कैद किया। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि रिद्धि की उम्र 7 साल और माही की उम्र लगभग 3 साल है। मां-बेटी दोनों ने तीन से चार बार एक-दूसरे पर हमला किया। उनकी दहाड़ और तेज़ लड़ाई देखकर वहां मौजूद लोग रोमांचित और चौंकित दोनों रह गए।
मां और बेटी की यह भिड़ंत जोन नंबर 3 के राजबाग क्षेत्र में हुई। झाड़ियों के बीच दोनों अपने इलाके और क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए आमने-सामने थीं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि रणथंभौर में यह सामान्य व्यवहार है, क्योंकि बाघों में अपने इलाके को लेकर सख्त प्रतिस्पर्धा होती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि यह मां-बेटी की पहली भिड़ंत नहीं है। तीन महीने पहले भी रिद्धि और माही इसी जोन नंबर 3 में आमने-सामने आई थीं। इस तरह की भिड़ंत में मां अपनी ताकत और अनुभव का इस्तेमाल करती है, जबकि बेटी नए अनुभव और कौशल सीखती है। इस बार भी मां रिद्धि ने अपने क्षेत्र की सुरक्षा करते हुए बेटी को पीछे हटा दिया।
सफारी पर मौजूद पर्यटकों के लिए यह दृश्य एक रोमांचक और दुर्लभ अनुभव रहा। कई टूरिस्टों ने कैमरे और मोबाइल फोन से इस भिड़ंत को रिकॉर्ड किया, जिसे सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की भिड़ंत से न केवल बाघों के प्राकृतिक व्यवहार को समझने का मौका मिलता है, बल्कि यह भी पता चलता है कि बाघ अपने इलाके और परिवार की सुरक्षा में कितना गंभीर होते हैं।
रणथंभौर टाइगर रिजर्व के अधिकारी कहते हैं कि मां-बेटी की इस तरह की लड़ाई वन्यजीवों के सामाजिक और क्षेत्रीय व्यवहार का हिस्सा है। आमने-सामने होने के बाद भी आमतौर पर गंभीर चोट नहीं होती, क्योंकि यह लड़ाई मुख्य रूप से क्षेत्रीय प्रभुत्व स्थापित करने के लिए होती है।
इस घटना ने रणथंभौर सफारी को और भी लोकप्रिय बना दिया है। पर्यटक यहां बाघों की प्राकृतिक झगड़े और शिकारी कौशल को करीब से देखने के लिए आते हैं। अधिकारी कहते हैं कि ऐसे दृश्यों को देखकर लोग बाघों की प्राकृतिक शक्ति और व्यवहार को समझ पाते हैं और वन्यजीव संरक्षण के महत्व को भी महसूस करते हैं।
