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राजस्थान के सरकारी स्कूलों में 1.20 लाख पद खाली, वीडियो में जाने स्टाफ की भारी कमी से शिक्षा व्यवस्था पर संकट; टोंक में भी 1041 पद रिक्त

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में 1.20 लाख पद खाली, वीडियो में जाने स्टाफ की भारी कमी से शिक्षा व्यवस्था पर संकट; टोंक में भी 1041 पद रिक्त
 
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में 1.20 लाख पद खाली, वीडियो में जाने स्टाफ की भारी कमी से शिक्षा व्यवस्था पर संकट; टोंक में भी 1041 पद रिक्त

राजस्थान सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट दर कम करने के लगातार दावे कर रही है। हालांकि जमीनी स्तर पर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की भारी कमी इन प्रयासों के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। शाला दर्पण पोर्टल पर उपलब्ध 1 जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के शिक्षा विभाग में स्वीकृत पदों का बड़ा हिस्सा अब भी खाली है, जिससे स्कूलों में पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, शिक्षा विभाग में कुल 4 लाख 13 हजार 910 स्वीकृत पद हैं। इनमें से केवल 2 लाख 93 हजार 760 पदों पर ही अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 1 लाख 20 हजार 150 पद अब भी रिक्त पड़े हैं। यानी विभाग के लगभग एक-तिहाई पद खाली हैं, जिसका सीधा असर सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है।

टोंक जिले की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। जिले में कुल 3,588 स्वीकृत पदों के मुकाबले 2,547 पदों पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 1,041 पद खाली हैं। इन रिक्तियों में शिक्षक, प्रधानाचार्य, व्याख्याता, प्रयोगशाला सहायक, पुस्तकालयाध्यक्ष और अन्य सहायक कर्मचारी शामिल हैं।

स्टाफ की कमी के कारण कई सरकारी स्कूलों में एक ही शिक्षक को एक साथ कई कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। वहीं अनेक विद्यालयों में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और अन्य विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसका असर न केवल शिक्षण की गुणवत्ता पर पड़ रहा है, बल्कि विद्यार्थियों के नामांकन और स्कूल में बने रहने की दर पर भी दिखाई दे रहा है।

ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में हालात और अधिक गंभीर बताए जा रहे हैं। कई विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षकीय और गैर-शिक्षकीय स्टाफ नहीं होने के कारण नियमित रूप से कक्षाएं संचालित करना भी चुनौती बन गया है। इससे विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और शिक्षा सुधार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सवाल उठ रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नई योजनाएं शुरू करने से शिक्षा व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नहीं आएगा। यदि स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक और अन्य कर्मचारी उपलब्ध नहीं होंगे, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर परिणाम और ड्रॉपआउट कम करने जैसे लक्ष्य हासिल करना कठिन होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार को रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया पूरी करने, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और मानव संसाधनों को मजबूत करने पर प्राथमिकता से काम करना होगा। तभी शिक्षा सुधार के दावों को जमीनी स्तर पर वास्तविक सफलता मिल सकेगी और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध हो पाएगा।