राजस्थान में 11,881 वरिष्ठ अध्यापक बने व्याख्याता, प्रमोशन के साथ स्कूलों में खड़ा हुआ नया संकट
राजस्थान के शिक्षा विभाग ने लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे 11,881 वरिष्ठ अध्यापकों (सैकंड ग्रेड) को बड़ी राहत देते हुए डीपीसी (डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी) के जरिए व्याख्याता पद पर पदोन्नत कर दिया है। यह फैसला वर्षों से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, इस संबंध में 13 अप्रैल को जोधपुर में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें विभिन्न विषयों के रिक्त पदों और पात्र उम्मीदवारों पर विचार किया गया। इसके बाद 18 अप्रैल को अलग-अलग विषयों के चयन आदेश भी जारी कर दिए गए। विभाग ने इसे एक बड़ी प्रशासनिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया है, क्योंकि लंबे समय से शिक्षक इस पदोन्नति का इंतजार कर रहे थे।
हालांकि, इस बड़े स्तर पर हुए प्रमोशन ने अब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। बड़ी संख्या में वरिष्ठ अध्यापकों के व्याख्याता पद पर जाने से स्कूलों में सैकंड ग्रेड शिक्षकों के पद खाली हो गए हैं। इसका सीधा असर स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों और शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले से ही कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पदोन्नति होने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों में इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है, जहां पहले ही स्टाफ की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित होती रही है।
शिक्षा विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन खाली पदों को जल्द भरने की है। यदि समय रहते नए शिक्षकों की नियुक्ति या तबादलों के जरिए व्यवस्था नहीं की गई, तो छात्रों की पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। खासकर बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन सकती है।
वहीं, पदोन्नत हुए शिक्षकों में खुशी का माहौल है। वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत रहने के बाद अब उन्हें उच्च पद और बेहतर वेतनमान का लाभ मिलेगा। कई शिक्षकों ने इसे अपने करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है।
