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Hanumangarh में बच्ची को खेलता छोड़ फंदे पर झूली मां, बेटी के सर से उठा माँ का साया
 

हनुमानगढ़ न्यूज़ डेस्क, हनुमानगढ़ दूध पिलाती बच्ची को खेलने के लिए छोड़कर मां ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। कई घंटे तक ग्यारह माह की बच्ची फंदे पर लटकी लाश के इर्द-गिर्द खेलती रही और हैरानी से शव को देखती रही। घटना का पता तब चला जब विवाहिता का पति शाम को काम से लौटा। घटना जिले के नोहर कस्बे के वार्ड एक दुर्गा कॉलोनी की है. इस संबंध में हरियाणा के सिरसा जिले के गांव पीरखेड़ा निवासी दयाराम पुत्र चुन्नीलाल जाट ने पुलिस को बताया कि उसकी बहन पूजा (24) पुत्री चुन्नीलाल की शादी यहां तहसील के गांव रतनपुरा निवासी बलजीत पुत्र महावीर से हुई थी. उसका साला परिवार सहित यहां वार्ड एक में रहता था। पूजा काफी दिनों से मानसिक रूप से परेशान चल रही थी। गुरुवार को निजी बस संचालक पति बलजीत शाम छह बजे काम से लौटा तो घर का दरवाजा अंदर से बंद पाया। काफी प्रयास के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला तो वह दीवार फांदकर अंदर घुस गया। देखा तो उसकी पत्नी पूजा कमरे में फंदे से लटकी हुई थी। उसके पास ग्यारह माह की बेटी खेलती मिली। उनकी शादी को साढ़े चार साल हुए हैं। पीहर पक्ष ने पूजा को मानसिक रूप से विक्षिप्त बताते हुए किसी भी तरह के संदेह से इनकार किया है। एसडीएम सत्यनारायण सुथार मामले की जांच कर रहे हैं।

नोहर। यहां थाने के पीछे नोहर रिलीफ सोसायटी द्वारा संचालित आनंद भवन वृद्धाश्रम में रह रहे सूरतगढ़ तहसील के गांव सांघर निवासी 84 वर्षीय विजयनाथ उर्फ ​​बिरजाराम पुत्र जातिराम मेघवाल ने फांसी लगा ली. आश्रम के ठीक सामने छत की रेलिंग पर फंदा बनाकर। ले लिया। फांसी से पहले रोज की तरह सुबह चार बजे उठे वृद्ध ने पूजा-अर्चना कर सिर पर पगड़ी बांधी। इसके बाद उसने आश्रम की छत की रेलिंग से सीधे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुबह करीब छह बजे पास के साईं मंदिर में पूजा-अर्चना करने गए एक व्यक्ति ने वृद्ध को फंदे पर लटका पाया, इसकी सूचना आश्रम संचालकों व पुलिस को दी. पुलिस ने परिजनों की मौजूदगी में यहां के सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाया और शव परिजनों को सौंप दिया। बिरजाराम अविवाहित था। उन्होंने अपने एक भतीजे को गोद लिया था। बताया गया कि भतीजे ने अपनी पंद्रह बीघा जमीन अपने नाम करवा ली, इसलिए वह घर छोड़कर चला गया। यहाँ से वे सूरतगढ़ के पास एक डेरे में सन्यासी के रूप में रहने लगे। उन्होंने अपना नाम भी बिरजाराम से बदलकर विजयनाथ कर लिया। करीब एक साल पहले जब यह नोहर आया तो लावारिस भटकता देख राहत सोसायटी संचालकों ने इसे वृद्धाश्रम में शरण दे दी। 12 दिसंबर 2021 से वह वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। गुरुवार को विजयनाथ के भतीजे प्रेम कुमार, सोहनलाल व भतीजे डॉ. ताराचंद, सार्दूल सिंह व करणी सिंह शव लेने पहुंचे.